186 23.2.1941 मैं पूछता हूं अस्पृश्य गवर्नर क्यों नहीं हो हो सकता? - तडवले (ढोकी) - Page 344

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सुबह ही बाबासाहेब से मिलकर बार्शी म्युनिसिपालिटी का कार्यक्रम तय कर लिया था। इसलिए तीन बजे वे बार्शी के लिए रवाना हुए। वहां म्युनिसिपालिटी के बाग में डॉ. बा­ बासाहेब को ‘अट होम’ पार्टी दी गई। तब श्री भातनकर ने बताया बार्शी म्युनिसिपालिटी ने अस्पृश्य नौकरों को अस्पृश्य छात्रों को और उनके बोर्डिंग की मदद की है और आगे भी करती रहेगी। जवाबी भाषण में डॉ. अम्बेडकर ने बार्शी म्युनिसिपालिटी को धन्यवाद दिया। साथ ही आशा व्यक्त की कि बाशी। म्युनिसिपालिटी अपनी कुव्वत में हमेशा अधिक से अधिक मदद करने की नीति अपना कर उस पर अमल करेगी। जरूरी काम के कारण मानपत्र लेने नहीं आ पाया लेकिन आज अॅट होम पार्टी में हाजिर हूं कह कर श्री भातनकर और उनके सहयोगियों को धन्यवाद दिया।

इसके बाद माफीदार महारवाड़े में आयोजित छोटे कार्यक्रम में डॉ. अम्बेडकर शामिल हुए। वहां श्री सखाराम बोकेफोडे, राजाराम वोकेफोडे आदि लोगों ने महारवाड़े के मंडप में महिलाओं द्वारा आरती हुई। इमारत फंड में मदद राशि देने का कार्यक्रम हुआ। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब वहां की अस्पृश्यों की बस्ती में गए। आगे वे कुर्डुवाड़ी जाने के लिए निकले। वहां किसान सोनवणे आदि बी. एल. रेल स्टाफ के लोगों ने फूलमालाएं और चाय-पार्टी देकर इमारत फंड में 101 रुपयों की मदद दी। कई अस्पृश्य बहनों ने स्टेशन में आकर पंचारतियों से बाबासाहेब की आरती उतारी और उन्हें इमारत फंड में मदद भी दी। कुर्डूवाड़ी के कार्यक्रम के बाद बेहद जरूरी काम के लिए डॉ. बाबासाहेब को मुंबई जाना पड़ा जिस कारण पंढरपुर, अकलूज, नातेपुते, मालसिरस के कार्यक्रम मजबूरी के कारण रद्द करने पड़े।