187 11.5.1941 कुत्ते की नहीं, इंसान की मानसिकता अपनाएं - परेल (मुंबई) - Page 345

324 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* कुत्ते की नहीं इंसान की मानसिकता अपनाएं

रविवार 11 मई, 1941 को तीसरा मुंबई अस्पृश्य विद्यार्थी सम्मेलन आयोजित किया गया था। सम्मेलन की ओर से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा चलाए गए इमारत फंड के लिए धन अर्पण करने हेतु पिं्र. दोंदे, बी. ए. म्युनिसिपल कारपोरेटर की अध्यक्षता में परेल मुंबई के आर. एल. भट्ट हाईस्कूल के प्रांगण में एक विशाल सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया था। सभास्थान पर अस्पृश्यों के इकलौते नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के आते ही वहां उपस्थित जनसमुदाय के द्वारा तालियों की बरसात कर उनका स्वागत किया गया। श्री वी. एस. पगारे ने पिं्र. दोंदे को अध्यक्ष स्थान स्वीकारने की विनती की। श्री सालबे ने उनकी विनती का समर्थन किया। उसके बाद अध्यक्ष प्रिंसिपल दोंदे, ने धन्यवाद अप्रण करनेवाला भाषण किया।

श्री वी.एस. गायकवाड़ (इंटर आर्टस) ने इमारत फंड के लिए छात्रों ने किस प्रकार रकम जुटाई इसकी विस्तृत जानकारी देने वाली रिपोर्ट पढ़ कर सुनाई। यह निधि तीसरे अस्पृश्य छात्र सम्मेलन की ओर से जमा किया गया। सम्मेलन के अवसर पर बचत के जरिए इमारत फंड की थोड़ी मदद करने की छात्रों की इच्छा थी। लेकिन सम्मेलन के लिए इक्ट्ठा की गई रकम बहुत कम थी जो वे इमारत फंड के लिए नहीं दे पाए। इस मदद करने की महत्वाकांक्षा को पूरी करने के लिए छात्रों ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के 49वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में छोटे-छोटे तमगे बनाए और उन्हें बेच कर कुल 886 रु. 6 पैसे पाए। इनमें से तमगे बनाने के साधनों पर खर्च की गई 34 रु. 15 आने 3 पैसे की रकम को उसमें से घटाने के बाद बचने वाला 51 रु., 1 आना और 3 पैसे की रकम आज की सभा में डॉ. अम्बेडकर को उनके इमारत फंड के लिए बच्चे देने वाले थे। इसमें से आधी से अधिक रकम सुश्री कमल मुरबाडकर ने जमा की है।

इस अवसर पर वि. भंडारे और एस. जे. जाधव ने इमारत फंड के बारे में प्रभावशाली भाषण किए।

बाद में सुश्री कमल मुरबाडकर ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का गुणवर्णन करते हुए छोटा-सा भाषण किया और छात्र समिति की ओर से डॉक्टर अम्बेडकर को 51 रु., 1 आना, 3 पैसों का पर्स अर्पण किया।

* जनताः 17 मई, 1941