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सरकार के खिलाफ नहीं बोलता था इसलिए कई लोग मुझ पर सरकार निष्ठ, देशद्रोही, जातिनिष्ठा आदि आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन आप सबको यह बात माननी पड़ेगी कि कोई भले चाहे जितना बलवान क्यों ना हो दुश्मन पर चौतरफा हमला नहीं कर सकता। मैंने भी हमेशा एक-एक दुश्मन पर हमला कर उसे नियंत्रण में लाने की कोशिश की है। इसी नीति को अपनाकर मैंने अपनी लड़ाई आज तक लड़ी है। लेकिन आज तक मैंने जिस सरकार के साथ पूरी ईमानदारी बरती वही आज हमारे खिलाफ हो गया है! इस देश में अंग्रेजों का राज्य हम लेआए हैं यह ऐतिहासिक सत्य है। अंग्रेजों के पास में खून बहा कर हमने पेशवा युग को समाप्त किया। 1818 में पेशवा युग का अंत हुआ। उस वर्ष में खडऱ्ा में हुई निर्णयात्मक लड़ाई में अंग्रेजों की जीत केवल महार वीरों की वीरता के कारण ही हुई। कोरेगांव में खड़ा विजयस्तंभ इसकी गवाही देता है। उस विजय स्तंभ पर दो नाम अंग्रेजों के हैं, दो पुरभय्यों के और अन्य सभी नाम महार वीरों के ही हैं!
जिन्हें हमने राज्य दिलाया आज वे ही हम पर दुलती झाड़ रहे हैं। अंग्रेजों को हमने राज्य दिलाया लेकिन उसमें भी फायदा उच्चवर्णियों को ही मिला है। आप किसी भी सरकारी दफतर में जाकर देखिए, आपको भी यही लगेगा। सरकार ने स्पृश्य हिंदुओं का
ख्याल रखा, मुसलमानों की हर मांग पूरी कर उन्हें भी हिंदुओं के जितना ही राजनीतिक महत्व दिया, लेकिन हमारे लिए क्या किया? पिछले डेढ सौ सालों के अपने शासनकाल में अंग्रेज सरकार ने अस्पृश्य समाज के लिए क्या किया इसका जवाब सरकार को देना होगा।
आज हमारे लिए कितना कठिन समय आ गया है। पहले गांव में या खेती में पेट भरने लायक कुछ मिल ही जाता था, लेकिन हमारे इस आंदोलन के कारण अब वह रास्ता भी बंद हो गया है। अधिकारियों के लिए सरकार अपनी तिजोरी खोल देती है। हमें एक रुपया तक देने के लिए वह तैयार नहीं है। इतना ही नहीं वह हमारे मुंह का कौर भी छीनना चाहती है। लेकिन मैं सरकार की हर चुनौती स्वीकारने के लिए तैयार हूं। सरकार को चुनौती के साथ चेतावनी देता हूं कि आप भले कुछ भी करें लेकिन लादी गई अतिरिक्त लगान का मैं जी-जान से विरोध करूंगा।
आज तक मैं कभी सरकार के खिलाफ नहीं गया। काँग्रेस के साथ मिल कर कभी मैं उनकी लड़ाई में शामिल नहीं हुआ। मैं किसी दंगे में शामिल नहीं हुआ। इस देश में शांति बनाए रखने की मैंने जितनी कोशिश की है उतनी और किसी ने नहीं की होगी। लेकिन सरकार को इसका अहसास नहीं है। आज सरकार हमें नहीं चाहती। हिंदू हमें नहीं चाहते। उन्हें मुसलमानों का सिर पर बैठना गंवारा है। अंग्रेजों को जो हमेशा सताते रहते हैं उनके आगे अंग्रेजों की सरकार झुक जाती है। आज तक अंग्रेज सरकार के बारे में हमने जो विश्वास पाला था आज हमें उसे छोड़ना होगा। यह एक लड़ाई है,