190 16.8.1941 अंग्रेज सरकार ने हमारे लिए क्या किया? - सिन्नर (नासिक) - Page 357

336 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

युद्ध है। मेरे भेजे खत का सरकार जवाब नहीं दे सकती। क्योंकि मैंने जो पक्ष रखा है वह न्यायोचित और सत्य है। मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि हमारी मांगे अगर नहीं माननी हैं तो उसका असर बड़ा घातक होगा। हमारी मांग बिल्कुल सारी है। हमारे पेट से जुड़ी हुई है। हमारी बस यही मांग है कि जिस प्रकार अन्य ईमानदारों को जमीनें देकर उन्होंने लगान से मुक्ति दी है उसी प्रकार हमें भी अपनी जमीनें देकर लगान से मुक्ति दीजिए। अन्य ईनामदार बिना कुछ काम किए जिस जिस प्रकार जीते हैं, वैसे हम कुछ मांग नहीं कर रहे हैं। सरकार को अगर यह मंजूर न हो तो तब विधिमंडल खुलेगा तब स्पृश्य हिंदुओं के प्रतिनिधि और हमारे प्रतिनिधियों की ओर से हम यह मसला आपस में हल कर लेंगे। लेकिन सरकार अगर वहां भी अडंगे लगाएगी तो हम उसका पूरा-पूरा विरोध करेंगे। उसका प्रतिकार करेंगे।

हम किस तरह प्रतिकार करेंगे यह आज बताना संभव नहीं है। क्योंकि यह पूरी तरह सरकार पर निर्भर है। सरकार जिस तरह की गति अपनाएगी उसी दिशा में हमें अपने प्रतिकार का रूख मोड़ना होगा। जो भी होगा, जान का जोखिम भी क्यों न पैदा हो, आपको अपनी जमीनें नहीं छोड़नी हैं। भाऊराव गायकवाड़ की कब गिरफतारी होगी कहा नहीं जा सकता। आज उन्हें अगर गिरफतार किया जाता है तब भी वह खुशी की ही बात होगी। उनकी जिम्मेदारी अपने सिर पर लेने के लिए कई लोग यहां तैयार हैं। इन नेताओं की गिरफतारी के बाद सरकार आप पर मामले दर्ज करेगी। पुलिस भेजेगी। लेकिन आपको डरना या डिगना नहीं है। घर पर कुर्की आए तो उसका विरोध करें। सामान को छूने न दें। जमीनें खालिसा कीं तो पूरे कुनबे के साथ खेत में झोंपड़े बना कर रहिए। पुलिस अगर गोली चलाए तब भी अपने खेतों से हटे नहीं। कोई परिवार अगर कारगार भेजा जाता है तो उसके अन्य रिश्तेदारों को उनकी जगह भरनी चाहिए। लगातार सरकार का सामना, विरोध करते रहना चाहिए।

यह हमारी लड़ाई है। इसमें कोई और हमारी सहायता नहीं करेंगे। यह लड़ाई हमें अपने सामर्थ्य से लड़नी है। किसी और की सहायता न भी हो तो भी हमें इस बात को निर्णय तक पहुंचना ही है। मैंने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है उससे आपको पता चलेगा कि सरकार के खिलाफ मेरे मन में कितना असंतोष भरा हुआ है। सरकार की इस अन्यायकारी नीति की कोई और सानी नहीं। बार्डोली में काँग्रेस ने सरकारी लगान देने से साफ इनकार किया तब सरकार सीधे काँग्रेस के आगे झुक गई। और काँग्रेस की कमीशन द्वारा तय किया लगान उसने स्वीकारा क्यों? क्योंकि काँग्रेस के पास पैसा और बल दोनों की कोई कभी नहीं थी। हम इन दोनों मामलों में उन्नीस हैं। लेकिन ध्यान रखिए कि न्याय और नीति दोनों हमारे पक्ष में हैं। आखिर हमारी न्यायपूर्णता की ही जीत होगी।