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* अंग्रेजों को बचाने के लिए नहीं, अपनो घर बिखर ना जाए
इसलिए
पिछले महायुद्ध के खत्म होने के बाद से महारों को सेना में भर्ती नहीं किया जा रहा था। लेकिन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की लगातार, लंबे समय तक की गई कोशिशों के कारण आगामी अक्तूबर महीने से महार लोगों की दो पलटनें बनाने का निर्णय हिन्दुस्तान सकार ने लिया है। महार युवक इस मौके का जरूर फायदा लें। इसी सिलिसले में बुधवार 24 सितम्बर, 1941 को रात 9 बजे परेल के आर. एम. भट्ट हाईस्कूल में सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में इतने ज्यादा लोग आ गए थे कि हॉल, छज्जा भरने के बाद लोगों को बाहर खड़े रहना पड़ा था।
ठीक सवा नौ बजे बाबासाहेब सभा स्थान पहुंचे। उनके आते ही सभास्थान तालियों की गड़गड़ाहट और जयकार की ध्वनियों से गुंज उठा। बाद में ‘जनता’ पत्रिका के प्र बंधक श्री के. वी. सवादकर ने सभा का प्रयोजन आदि लोगों को बताया और बाबासाहेब से बोलने की विनति की।
तालियों की गड़गड़ाहट के बीच डॉ. बाबासाहेब बोलने के लिए उठे। उन्होंने अपने भाषण में कहा-
सज्जनों!
आज अविलंब बुलाई गई सभा का मुख्य उद्देश्य है हिंदुस्तान सरकार द्वारा हमारे समाज के लिए जो दो बटालियन्स बनाई हैं उनके बारे में मैं आपको जानकारी दे सकूं। 1931 में 111वीं महार पलटन बनी थी। उस पलटन के सैनिकों ने पिछले महायुद्ध में महार समाज का क्षात्रतेज लोगों को दिखा दिया था। लेकिन, महायुद्ध खत्म होने के बाद सरकार ने इस पलटन को बंद कर दिया। उसके बाद पलटन में भर्ती होने के लिए कई महार युवाओं ने अर्जियां दी थीं। लेकिन उन्हें पलटन में नहीं लिया गया। युद्ध खत्म होने के बाद सरकार ने अस्पृश्य लोगों का कामगार जत्था (Labour Corps) बनाने की योजना रखी। इस बारे में जब मुझसे पूछा गया तब मैंने सरकार को बताया कि जब आप अस्पृश्यों को पलटन में नहीं ले रहे हैं इसलिए हमारे लोग आपके कामगार जत्थे में शामिल नहीं होंगे। आपको कामगार जत्थे के लिए अगर अपने लोग चाहिए तो पहले हमारे लोगों को
* जनताः 27 सितम्बर, 1941