191 24.9.1941 अंग्रेजों को बचाने के लिए नहीं, अपना घर बिखर न जाए इसलिए.... - परेल (मुंबई) - Page 359

338 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पलटन में शामिल कर लें। मेरे कहने का सरकार पर असर हुआ और सरकार ने हमारी एक पलटन बनाना तय किया। एक और पलटन बनाने का भी आश्वासन मुझे दिया गया है। मैंने उन्हें यह भी बताया था कि पलटन के महार चपरासी तथा उनके अफसर ऊंची जाति के न हों। अधिकारी भी महारों के ही हों। मेरी यह मांग भी सरकार ने मान ली है। सो अब हमारे लोगों को केवल जमादार, सुबेदार के पदों पर ही नहीं लिया जाएगा। बल्कि लेफटनेंट जैसे पदों पर भी किया जाएगा। बातचीत का दौर इन निर्णयों तक आ पहुंचा है। पिछले शनिवार के दिन मेरी और सम्माननीय गवर्नर की मुलाकात हुई। वहां मुझे बताया गया कि अब तक 600-700 अस्पृश्यों ने इस पलटन में अपने नाम दर्ज किए हैं। लेकिन उन्हें अफसर के पद के लिए हमारे बीच से किसी योग्य व्यक्ति की कमी

खल रही है। मुझसे यह भी कहा गया है कि, हमने जिस प्रकार आपकी शर्तें मान लीं उसी तरह अधिकारियों के पदों पर नियुक्ति के लिए लायक उम्मीदवार उपलब्ध कराना आपका कर्तव्य है।’’ इसीलिए दोनों पलटनों में अधिकारियों के पदों के लिए लायक उम्मीदवार भेजना जरूरी है।

कुछ लोगों के मन में इन पलटनों के बारे में एक पैदा हुए। उन्होंने मुझसे पूछा कि, वाइसरॉय के विस्तारित कार्यकारी मंडल में अस्पृश्यों के एकाध प्रतिनिधि तक को नहीं लिया गया। साथ ही सरकार द्वारा महार इनामदारों पर अतिरिक्त लगान लगाए जाने के कारण आजकल हम इस अन्याय के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। फिर सेना में भर्ती होकर उसी सरकार की मदद कैसे करें? आज की सभा में हम इन्हीं सवालों के जवाबों पर सोचेंगे।

आज कल हिंदुस्तान के अन्य समाजों की सोच कैसी है यह मैं आपको बताऊं। काँग्रेस का कहना है कि अंग्रेज जब हमें स्वराज नहीं देते तो हमें भी उनकी मदद नहीं करनी चाहिए। हम संदर्भ में मैं आपको दो बातें बताता हूं। पहली बात यह कि मानलीजिए किसी आदमी का घर है, दूसरा आदमी उसे जबर्दस्ती बाहर कर घर पर कब्जा किए बैठा है। तीसरा आदमी आकर दूसरे आदमी को धमकाता है कि तू घर से बाहर निकल वरना मैं घर में आग लगा दूंगा। यही बात आज हो रही है। हम इस देश के मालिक हैं। अंग्रेज हमारे देश पर कब्जा किए बैठे हैं। औरों की तरह हमारी भी यही इच्छा है कि वे यहां से जाएं। हिटलर अगर अंग्रेजों से कहने लगे कि आप इस देश से निकल जाओ वरना हम इस देश को जला कर राख कर देंगे। आप बताइए, अगर हिटलर देश को जला देगा तो नुकसान किसका होगा? नुकसान अंग्रेजों का नहीं होगा, इस देश के लोगों का होगा। इस बात को आपके तौर पर गांठ बांध ले।

इस लड़ाई में अंग्रेजों की मदद करने के लिए मैं जो आपसे कह रहा हूं वह अंग्रेजों को बचाने के लिए नहीं वरन् अपने घर को राख होने से बचाने के लिए।