99 25.1.1937 जाली दस्तावेज बनाने वाले क्या गरीबों, खेतीहरों, मजदूरों का कल्याण करेंगे? - अहमदनगर - Page 36

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* जाली दस्तावेज बनाने वाले क्या गरीब,खेतीहरों, मजदूरों का

कल्याण करेंगे?

अहमदनगर में 25 जनवरी, 1937 को पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कैंप सदर स्थित शनि मंदिर के पीछे लगाए गए भव्य शामियाने में अहमदनगर की अस्पृस्य जिला परिषद की ओर से अखिल भारतीय अस्पृस्य समाज के इकलौते नेता परमपूज्य डॉ. ब­ ाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में सभा की गई। इस सभा में करीब 5-6 हजार लोग उपस्थित थे। लोगों में अपार उत्साह और आनंद नजर आ रहा था। लोग आतुरता से डॉ. बाबासाहेब के आने का इंजतार कर रहे थे। स्पृस्य और अधिकारी वर्ग से भी कुछ लोग वहां उपस्थित थे। मंडप में पुणे के श्री अर्जुनराव नतावडे, पारगांवकर भानुदास, नेवासकर कबराम और पंदीरीनाथ बुवा बड़े उत्साह के साथ (वीरश्रीयुक्त) लोक गीत प्रस्तुत कर लोगों से वाहवाही लूट रहे थे। कृपाजी मिजाजी चाबुकस्वार, चखणगावकर कवि आदि ने बाबासाहेब का गुणवर्णन करनेवाले वीरश्रीयुक्त पोवाडे गाए। बाबासाहेब 8 बजे आने वाले थे लेकिन दोपहर के बारह बजे तक भी वह जब नहीं आए तब वहां उपस्थित स्पृस्य वर्ग के लोगों में थोड़ी निराशा फैलने लगी। लेकिन अस्पृस्य वर्ग के लोगों में उत्साह और आनंद का वातावरण ही था। लोगों के झुंड के झुंड बाबासाहेब के दर्शन पाने के लिए इंजतार में बैठे थे। बाबासाहेब के आने की राह में उनका स्वागत करने के लिए फर्स्ट लॉयन स्काऊट बैंड और स्काऊट, राधीचमला के ‘बलभीम स्काऊट’, मातंग प्रभृति मंडल स्काऊट, मालीवाड़ा, दरेवाड़ी का स्काऊट, पेवशव लाइन कैंप का मातंग स्काऊट, बाकोडी का स्काऊट आदि मिलाकर करीब 300 स्काऊट लाठी और बैंड के साथ उपस्थित थे। साथ ही शहरीकर महार मंडली के बैंड, तुरही, रणसिंगा आदि बाजों से वातावरण गूंज रहा था। हर तरफ वीरश्री छायी थी और बाबासाहेब के नाम की जयकार गूंज रही थी। ठीक 2 बजे दोपहर बाबासाहेब की गाड़ी आई। एक बार फिर बाद्य और जयकार की घनघोर आवाज वातावरण पर छा गई। बाबासाहेब की मोटर में श्री प्रभाकर रोहमसाहब, कर्जत के श्री बी.एस. कदम, नगर के एस.आर. सालवे और विठ्ठलराव गायकवाड आदि लोग थे। बाबासाहेब को सभी स्काऊट ने बैंड के साथ सलामी दी। उस समय वहां वीरता का वातावरण बना था। बाबासाहेब की गाड़ी को चारों ओर से घेरे लाठी लिए स्काऊट कतार में गाड़ी के साथ-साथ आगे बढ़ रहे थे। बाजे बज रहे थे। असीम जनसमुदाय भी इस जुलूस में शामिल था। जगह-जगह समूहों मेंखड़ी

* जनताः 13 फरवरी, 1937