16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
महिलाएं बाबासाहेब पर फूल बरसा रही थीं, फूलमालाएं अर्पण कर रही थीं। जुलूस के बाद बाबासाहेब मंच पर विराजमान हुए। कायदे से सभा की शुरूआत हुई। परिषद के सचिव रंगनाथ मास्तीराव सूर्यवंशी ने उपस्थित लोगों का अभिनंदन किया। डॉ. बाबासाहेब नगर जिले में आए इसलिए कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्होंने उनके प्रति आभार प्रकट किया। इसी प्रकार स्वागताध्यक्ष सखाराम बालाजी भिंगार दिवे ने बाबासाहेब का स्वागत करते हुए भाशण दिया। वहां उपस्थित लोगों को बाबासाहेब का परिचय दिया। मे. रामद्रिं मकाजी नलाबडे (ढोर), श्री सोनवणे (ढोर), नगर के मातंग समाज के नेता शंकरराव साठे (मालीवाड़ा), महार समाज के श्री भाऊराव यशवंत कदम, मारुतीराव गायकवाड़ देहरेकर, यहावंत श्रावण पाटोले आदि लोगों ने नगर जिले की ओर से श्री प्रभाकर जनार्दन रोहम को ही चुनाव में जिताना कितना जरूरी है यह बताया। उन्होंने बाबासाहेब को आश्वासन दिया कि हम उन्हें बहुमत दिलाकर जिताएंगे। उसके बाद स्काऊट मास्टर शंकरनाथ कुशाबा कांबले ने बाबासाहेब का कर्तृत्व, चमार समाज का समाजद्रोही और घातक बर्ताव कांग्रेस की कृतघ्न नीति आदि के बारे में प्रभावी भाषण दिया और लोगों से अपील की कि वे अपने नगर जिले की ओर से चुनाव जिताएं। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब भाशण के लिए उठकरखड़े हुए तब सब ओर बाबासाहेब के जयकार की घोषणाएं होने लगीं और तालियां बजती रहीं।
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा,
भाइयों और बहनों,
आज की सभा में लोगों की यह अपार भीड़ और नगर जिले के लोगों का अपरिमित उत्वाह देखकर मुझे आनंद हो रहा है। आप जानते हैं कि आज की यह सभा रा. रोहम के चुनाव के संदर्भ में है। अपनी पार्टी से जिन उम्मीदवारों को मैंनेखड़ा किया है उनकी चुनाव प्रचार में मदद करना मेरा कर्त्तव्य है। इस जिले के महारमांग लोगों रा. रोहम के लिए विरोध नहीं यह बड़ीखुशी की बात है। केवल चमार समाज उनके विरोध में हैं। लेकिन आप उनकी फिक्र ना करें। आप उनके उम्मीदवारों को अपना मत ना दें। यह बात मैं आपसेखुले आम कह रहा हूं। अस्पृस्य वर्ग के लिए जो हक हमने पाए हैं उनका कुल अस्पृस्य वर्ग में बंटवारा हो यह सही बात है। लेकिन चमार समुदाय ने शुरू से कभी किसी काम में मेरा साथ नहीं दिया। इतना ही नहीं, राऊंड टेबल परिषद में मैं जब स्पृस्य हिन्दुओं से और सरकार से झगड़ रहा था तब इन लोगों ने पार्लियामेंट में तार भेजे कि अम्बेडकर हमारे नेता नहीं हैं इसलिए उनकी बातें मानी ना जाएं। नासिक सत्याग्रह के दौरान हमारे लोगों पर स्पृस्यों से जो ईंपट-पत्थरों की वर्षा की गई थी उसमें चमार भी शामिल थे। यह भी मैं जानता हूं। (सभास्थली धिक्कार-धिक्कार, शेम-शेम की ध्वनि से गूंज उठी)। इसलिए कहता हूं, सोचिए। जो लोग मेरे काम में बखेड़ेखड़े