340 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कॉलेजों में पढ़ रहे और अन्य सुरक्षित युवकों को आगे आना होगा। सरकार ने मुझे यह आश्वासन भी दिया है कि अगर युद्ध के बाद अगर ये पलटनें बर्खास्त की गईं तो पलटन के लोगों को सिविल में अच्छी नौकरियां देने का प्रबंध किया जाएगा। सो, आपसे यही कहना है कि, जब इतनी सुविधाएं उपलब्ध हैं तो उनका फायदा उठाना हम पर निर्भर करता है। पढ़े-लिखे लोगों पर यह जिम्मेदार है यह भूलना नहीं चाहिए।
हमारे युवकों को छांव में बैठने की आदत छोड़ देनी चाहिए। मुझे भी यही लगता था कि छांव में, आराम से की जा सके ऐसी कोई नौकरी मुझे मिलनी चाहिए। आ जकल सब लोग महारों के खिलाफ है। अन्य जाति के लोगों के मन में ढेढों के बारे में, चमारों-भंगियों के बारे में प्रेम है। लेकिन महारों के बारे में किसी के मन में प्रेम नहीं है। इसकी कोई दूसरी-तीसरी वजह नहीं है, वजह मैं ही हूं। अन्य लोग मुझे पिशाच मानते हैं और मेरे साथ आस-पास रहने वालों को भूतों का जमावड़ा मानते हैं। 1926 से मैं अस्पृश्यों के न्यायपूर्ण हकों के लिए झगड़ता रहा हूं। अस्पृश्यों को पुलिस में नौकरी दिलाने के लिए मैं सरकार से भिड़ा। इससे फायदा यह हुआ कि आज एक चमार और दो मांग (ढेंढ) सब-इन्सपेक्टर्स हैं। महार एक भी नहीं। वजह केवल इतनी है कि साक्षात्कार के लिए जिन महारों को बुलाया गया था उनसे यही पूछा गया कि आप डॉ. अम्बेडकर के चेले हैं? उन्होंने ‘हां’ कहा तो उन्हें चुना नहीं गया। वैसे पुलिस सब-इन्सपेक्टर के ओहदे के साथ मेरा क्या तालुक है? इसी प्रकार पिछले महीने में हमारे कुछ उपाधि-धारकों मामलतदार के पद के लिए साक्षात्कार हेतु केन्द्रीय विभाग के राजस्व आयुक्त ने बुलाया था। उनसे वहां अतिरिक्त लगान के बारे में सवाल पूछे गए। वे तीनों उम्मीवार महार होने के नाते उनमें से किसी एक को भी काम पर नहीं रखा गया। मैं इन अधिकारियों से यह पूछना चाहता हूं कि अतिरिक्त लगान और उम्मीदवारों के साक्षात्कार का आपसी तालुक क्या है? और अतिरिक्त लगान से संबंधित सभी सवालों के सही-सही जवाब मिलने के बावजूद एक भी महार उम्मीदवार को क्यों नहीं चुना गया? संक्षेप में कहना हो तो महार जाति पर सबका कटाक्ष है। हमारे समाज के युवकों को मामलतदार, सब-जज, डेप्यूटी कलक्टर बनना कठिन है। लेकिन 2 सालों तक मिलिट्री में नौकरी करने के बाद बड़ा अधिकारी बनना आपके लिए बेहद आसान हो जाएगा इसमें कोई शक नहीं। इसीलिए हमें आगे चल कर अगर फायदा कमाना हो तो पहले कुछ दिनों तक तकलीफ झेलना जरूरी है। मेहनत के बगैर फल नहीं मिलता यह हमें ध्यान में रखना चाहिए। इसीलिए, जो मैट्रिक तक पढ़े हैं, जो बी. ए. तक पढ़े हैं उन्हें जरूर इस मौके का फायदा उठाना चाहिए।
अधिकारियों के इन पदों के लिए अगर हम अपने उम्मीदवार नहीं भेजते तो इस जगह पर अन्य जातियों के उम्मीदवारों को नियुक्त किया जाएगा। ऊंची जाती के लोगों