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के मन में हमारे बारे में प्रेमभाव नहीं है यह मुझे आपसे कहने की जरूरत नहीं है। आप यह बात जानते ही हैं। वे अगर अधिकारी बने तो हमारे चपरासियों के खिलाफ चाहे जो झूठे आरोप लगा कर सरकार पर यह बात जाहिर करने से चूकेंगे नहीं कि महार सेना में काम करने के लायक ही नहीं हैं।
इसीलिए हममें से जो पढ़े-लिखे युवा हैं उनके लिए यह अच्छा मौका है। कॉलेज की पढ़ाई के बाद हमारे युवाओं को दफतरों में बाबुओं की नौकरियां करनी पड़ती हैं। उनमें उन्हें तरक्की के बहुत कम मौके मिलते हैं। मामलतदार के पद के लिए बार-बार उम्मीदवारी करते रहने से 2 सालों तक अगर सेना में नौकरी की जाए तो उस व्यक्ति को भरपूर तनख्वाह मिलती है। युद्ध समाप्ति के बाद सिविल में कुछ वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति करते समय युद्ध के दौरान सेना में नौकरी करने वालों को रियायतें दी जाएंगी।
अगर हमारी पलटनें बर्खास्त हुईं तभी यह मसला उपस्थित होगा लेकिन सरकार द्व ारा मुझे वचन दिया गया है कि ये पलटनें युद्ध के बाद भी बनी रहेंगी।
सेना में भर्ती होने से लोग डरते हैं। लेकिन आज के युद्ध के वातावरण को देखें तो अनुमान लगाया जा सकता है कि युद्ध जल्द ही खत्म होगा। ‘‘जो कुमकुम रखा रहता है उसे जो लगाती है वह सुहागन है, और जो नहीं लगाती है वह बेवा है,’’ कहावत के अनुसार युवकों को इस मौके का लाभ जरूर उठाना चाहिए। इतना कह कर मैं अपना भाषण पूरा करता हूं।
डॉ. अम्बेडकर के भाषण के बाद पुणे के श्री पां. ना. राजभोज ने भाषण किया। अपने भाषण में उन्होंने बताया कि बाबासाहेब के कारण हमें यह मौका मिल रहा है इसलिए सभी को उससे जरूर लाभ उठाना चाहिए। आदि।
बाद में, डॉ. बाबासाहेब की जयध्वनि के साथ सभा बरर्खास्त हुई।