346 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
में से हरेक को हुआ है। सो, क्या यह एक सामाजिक क्रांति नहीं है?
कोई इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि धार्मिक रूप से हमने जितनी क्रांति की है उतनी क्रांति अन्य किसी समाज ने नहीं की है। हिंदू धर्म में न्याय, नीति, समानता, बंधुत्व आदि पर जोर नहीं दिया गया है। इंसान को जलाने वाली कई सारी उपाधियां जरूर हैं। धर्म के नाम से हमारे लिए जो घातक था वह सब हम करते रहे थे। लेकिन आज धार्मिक नजरिए से हम जितने उज्ज्वल दिखाई देते हैं उतना कोई हिंदू समाज दिखाई नहीं देता। मराठा, मंडारी आदि जातियों में होली के स्वांग आज भी धडल्ले से प्रचलित हैं। उसमें उन्हें आनंद और अभिमान महसूस होता है। लेकिन हमने यह सब त्याग दिया है। अब हम पहले की तरह भक्तिभाव से पोथी-पुराण नहीं पढ़ते। हममें से मंत्रतंत्र, साधु-संत सब खत्म हो चुके हैं। इसीलिए हमारा समाज आज बिलकुल सापु दिखाई देता है।
राजनीतिक उन्नति के बारे में भी यही हाल है। बेहद कम समय में हमने जितनी राजनीतिक उन्नति हासिल की है। उतनी किसी अन्य समाज की नहीं हुई है। यह बात सबको माननी ही पड़ेगी। सरकारी नौकरियां, म्युनिसिपालिटयां, डिस्ट्रिक्ट बोर्ड आदि सभी स्थानीय स्वराज संस्थाएं स्पृश्यों की हमेशा की जागीर बन गई थी। उनके सारे गलिज काम करने के लिए ही हम थे। हमारा कोई आदमी अधिकार के पद पर नहीं था। लेकिन आज ऐसी कोई स्थानीय स्वराज संस्था नहीं है जिसमें हमारे लोग नहीं हैं। जिनके साए से भी लोग बचते थे, राजनीति में जो अनाधिकारी साबित किए गए थे वे अस्पृश्य लोग ब्राह्मणों के बराबरी के साझीदार बन कर आज देश के कामकाज में ध्यान दे रहे हैं।
सो, यह साधारण, संक्षिप्त लेखा-जोखा है। कई लोगों का कहना है कि अम्बेउकर ने कुछ नहीं किया है! आज की ही एक साप्ताहिक पत्रिका में मेरी आलोचना छपी है। मैं, हिटलर और कर्वे एक ही हफते में पैदा हुए हैं। इस आधार से उस पत्रकार ने जो निष्कर्ष निकाला है वह यह है कि हिटलर ने कार्य किया, कर्वे ने कार्य किया लेकिन डॉ. अम्बेडकर ने कुछ भी नहीं किया! मुझे यह बताने की जरूरत नहीं है कि मैंने कुछ किया है अथवा नहीं किया है। अपना नेतृत्व मैं किसी के सामने रख कर इतराना नहीं चाहता। लेकिन इस बारे में एक बात साफ करना बेहद जरूरी है। मेरे बारे में कोई कुछ कहे मुझे उसकी परवाह नहीं है। लेकिन आपने जो क्रांति की है वह एक बहुत बड़ी क्रांति है यह हमें भूलना नहीं चाहिए।
यह पूर्वावलोकन आज मैंने क्यों पेश किया? आज हमारे समाज के भविष्य के बारे में मैं जो निवेदन करना चाहता हूं और जिस निवेदन के लिए आज के इस अवसर पर मैं खासतौर से यहां उपस्थित हुआ हूं उसे बताने से पहले हमारे आंदोलन अब तक का स्वरूप ठीक से ध्यान में आए इसलिए मैंने यह भूमिका आपके सामने पेश की। मुझे