194 18/19.7.1942 जनतंत्र जीवित रहा तो उसके पफता जरूर मिलेंगे, लेकिन अगर जनतंत्र का खात्मा हुआ तो विनाश अटल है - नागपुर - Page 370

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(श्री राजहंस पाटील संपादक, ‘श्यामसुंदर’ द्वारा दी गई जानकारी) ख्1,

‘‘दिनांक 18 जुलाई, 1942 का दिन। सुबह नौ बजे का समय। स्थान नागपुर रेलवे स्टेशन। हजारों की संख्या में महिला और पुरुषों ने रेलवे स्टेशन के सभी प्लेटफार्म

खचाखच भरे थे। सब ‘बाबासाहेब अम्बेडकर जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे। समता सैनिक दल के करीब पांच हजार सैनिक वर्दी पहन कर खड़े थे। उनमें बेहतर अनुशासन के दर्शन हो रहे थे। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की ट्रेन के आने का समय हो गया था। जैसे ही उनकी गाड़ी स्टेशन में आई चारों ओर से नारों की आवाजें गूंज उठीं। डॉ. बाबासाहेब रेल के डिब्बे से नीचे उतरे। उनके साथ मद्रास के एन. शिवराज भी थे। शेडल्यूड कास्टस फेडरेशन की स्थापना करने के लिए जो खास परिषद नागपुर में हो रही थी उसमें शामिल होने के लिए रेल से आ रहे डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और एन. शिवराज का स्वागत करने के लिए वह प्रचंड जनसमुदाय रेवले स्टेशन पर जुटा था। भारत के सभी प्रांतों से अस्पृश्य समाज के प्रतिनिधि वहां बड़े उत्साह के साथ एकजुट हुए थे। किसी प्रचंड लौहा चुंबक की ओर जिस प्रकार लोहे के सभी कण आकर्षित होते हैं उसी प्रकार डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के प्रति निष्ठा के कारण तमाम अस्पृश्य जनता नागपुर में जुटी थी। केवल अस्पृश्य समाज की ही नहीं वरन किसी भी समाज के किसी भी नेता के लिए इससे पहले नागपुर में इतना विराट जनसमूह इक्ट्ठा नहीं हुआ था। वह दृश्य अद्भुत था। ख्2,

‘‘ऑल इंडिया शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन से पहले स्वतंत्र लेबर पार्टी अस्तित्व में भी। डॉ. बाबासाहेब ने उस पार्टी की ओर से क्रिप्स मिशन के आगे अस्पृश्यों की राजनीतिक कैफियत रखी। तब क्रिप्स साहब ने कहा कि, लेबर पार्टी जाति आधारित राजनीति का पृष्ठपोषण नहीं कर सकती, सो, अस्पृश्य वर्ग की ओर से उनकी कैफियत को आप खुद करें क्या तर्कनिष्ठ होगा? आप किसी अन्य जातीयवादी संस्था की तरफ से कैफियत रखें। दिल्ली में जब यह घटना घटी तब बाबासाहेब ने सभी नेताओं को तार भेज कर बुलवा लिया। उनके सामने सभी हालात प्रकट किए और नई संस्था निर्माण करने की अपनी इच्छा व्यक्त की। डॉ. बाबासाहेब ने संस्था का नाम और संविधान पहले से तैयार कर रखा था। तब तय हुआ था कि नागपुर में बड़ी परिषद लेकर फेडरेशन की स्थापना की जाए और संविधान का भी निर्माण किया जाए। डॉ. बाबासाहेब ने ये सभी काम दिल्ली में पहले से कर रखे थे। उन्हें इस परिषद में कानूनी स्वरूप प्राप्त हुआ। इन तीन परिषदों के नाम थे-

1 विदर्भ के दलित आंदोलन का इतिहासः एच.एल. कोसारे, पृष्ठ 529

2 समग्र अम्बेडकर चरित्र - बी. सी. कांबलेः खंड 16वां, पृष्ठ 47-48