194 18/19.7.1942 जनतंत्र जीवित रहा तो उसके पफता जरूर मिलेंगे, लेकिन अगर जनतंत्र का खात्मा हुआ तो विनाश अटल है - नागपुर - Page 379

358 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

चल रहा था तब सेना में फिर से महारों को भर्ती किया जाने लगा। महार सैनिकों का एक दल बनाया गया। युद्ध समाप्ति के बाद सैनिकों के इस दल को बरर्खास्त कर दिया गया। हालांकि अब फिर से हमारे सैनिक दल बनाए गए हैं। हमारे युवाओं को अफसर पद दिए जा रहे हैं। और हमारे पांच-छह युवकों को सेना में राजपत्रित अधिकारियों के पद दिए गए हैं। वहां उन्हें सम्मान के पद प्राप्त हुए हैं। हमारी उन्नति सबसे अधिक हमारी महिलाओं की स्थितियों में व्यक्त होती है। आप देख ही रहे हैं कि इस परिषद में बीस से पच्चीस हजार महिलाएं उपस्थित हैं। क्या कोई कह सकता है कि ये अस्पृश्य महिलाएं है? हमारी महिलाओं की उन्नति बेहद आश्चर्यजनक और हमारे आंदोलन का स्फूर्तिदायी रूप है। जाहिर है, यह बेहद संतोषजनक बात है। हम सबको जिस बारे में बेहद गर्व महसूस हो ऐसी यह हमारी उन्नति है। अपनी इस उन्नति के लिए किसी को धन्यवाद देने की जरूरत नहीं है। वह हिंदू लोगों की दया का असर नहीं है। यह पूरी तरह हमारे परिश्रम के फल हैं। सवाल अब यह है कि इस प्रगति को बनाए कैसे रखा जाए? यह ऐसा सवाल है जो हमेशा अपने आप से पूदते रहना जरूरी है। विभिन्न जातियों की स्पर्धा में अगर किसी एक जाति की उन्नति होती दिखाई दे तो यह केवल उस जाति के पास होने वाली शक्ति को ही केवल परिणाम होते हैं। हो सकता है यह शक्ति आर्थिक हो, सामाजिक हो या राजनीतिक हो। हमें सोचना यह है कि अपनी उन्नति वो जारी रखने के लिए क्या हमारे पास शक्ति है? क्या हमारे पास आर्थिक शक्ति है? यकीनी तौर पर कह सकता हूं कि नहीं है। हम केवल गुलाम हैं। क्या हमारे पास सामाजिक शक्ति है? मुझे यकीन है कि इस सवाल का जवाब ‘नहीं है’ यही है। हम मानव-जाति का एक अवमानित हिस्सा हैं। इसीलिए लगातार अपनी उन्नति के लिए हम जिस पर निर्भर रह सकते हैं ऐसी एक ही बात है और वह है कि हम राजनीतिक शक्ति हासिल कर लें। इस शक्ति के बगैर हमारा सर्वनाश होगा। हमारी मुक्ति की बस यही एक राह है। इस बारे में मुझे बिल्कुल संदेह नहीं है। इसीलिए इस मसले पर हम सभी को अपना ध्यान केन्द्रित करना ही पड़ेगा। यह हमारे लिए जीने-मरने का मसला है। राजनीतिक ताकत हासिल करने के बारे में हमारा भविष्य क्या है? हमारे लिए सहायक और विरोधी ताकतों के बारे में संक्षेप में एक बार फिर जानना आपके लिए अच्छा रहेगा। ऐसी ताकतों के अहसास के कारण आपके लिए अपने भविष्य की नीति निर्धारित करना आसान होगा। फिर हर बात को आप अच्छी तरह जांच-परख कर ही मंजूरी देंगे।

मेरी राजनीतिक सफलता का गुर आज मैं आपको बताता हूं। हो सकता है आपको वह पता भी हो। इसके बावजूद एक बार फिर बताना ठीक रहेगा। अस्पृश्य लोग हिंदुओं का एक विभाग या उप-विभाग नहीं है। भारत के राष्ट्रीय जीवन का वह पृथक, स्पष्ट और साफ घटक है। यही सिद्धांत मेरी राजनीति की बुनियाद है। जिस प्रकार मुसलमान हिंदुओं से साफ तौर पर अलग दिखाई देते हैं उसी प्रकार अस्पृश्य भी हिंदुओं से अलग