194 18/19.7.1942 जनतंत्र जीवित रहा तो उसके पफता जरूर मिलेंगे, लेकिन अगर जनतंत्र का खात्मा हुआ तो विनाश अटल है - नागपुर - Page 381

360 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनशन के कारण बनाए गए पुणे करार में माननी ही पड़ी।

इस प्रकार, पहले दौर में अस्पृश्यों की ही जीत हुई। महायुद्ध छिड़ने के बाद तथा भारतीय राजनीति में काँग्रेस को महत्वपूर्ण स्थिति प्राप्त होने के बाद भी हमारी स्थिति पक्की और मजबूत थी। अभी भी हमें अपने हक मिलने की उम्मीद कायम थी और 8 अगस्त, 1940 के वाइसराय के बयान के कारण वह टिकी हुई थी। उनके निवेदन में साफ तौर पर कहा गया था कि अस्पृश्य और मुसलमान भारतीय राष्ट्रजीवन के महत्वपूर्ण स्पष्ट और पृथक घटक होने के कारण जिस संविधान को मुसलमान और दलित वर्ग का समर्थन प्राप्त नहीं होगा उस संविधान को अंग्रेज सरकार लागू नहीं करेगी।

अब तक हमारी स्थिति की मजबूती के बारे में मैंने बताया। इसलिए अब मुझे हमारी स्थिति को कमजोर करनेवाली शक्तियों के बारे में भी बताना होगा। हमारी स्थिति को कमजोर करनेवाली बेहद विघातक बात है गांधी और गांधीवाद। पुणे करार पर हस्ताक्षर कर मैंने गांधी के प्राण बचाए हैं। लेकिन मैं जानता हूं कि किसी सभ्य व्यक्ति की तरह हस्ताक्षर कर श्री गांधी ने उसे स्वीकारा नहीं है, बल्कि एक कुटिल व्यक्ति द्वारा कठिन स्थितियों से अपने आप को छुड़ाने के लिए उस पर हस्ताक्षर किए है। क्योंकि, मैं आपको याद दिला दूं कि पुणे करार से भले गांधी को जीवनदान मिला हो लेकिन इस करार में शामिल सिद्धाते को उन्होंने कभी भी ईमानदारी से और तहे दिल से नहींमाना है। अस्पृश्यों को अलग से राजनीतिक अधिकार न मिलने देने की उन्होंने ठान ली है। हमारे अधिकारों के खिलाफ तथा हमारी स्थिति कमजोर करने के लिए जो-जो भी किया जा सकता है वह सब करने के लिए वह हमेशा तैयार मिलेंगे। मुझे लगता है कि आप लोगों को यह बात अच्छी तरह ध्यान में रखनी होगी कि गांधी हमारे सबसे बड़े प्रतिपक्षी हैं। ‘दुश्मन’ शब्द का प्रयोग करने लायक स्थितियां और समर्थन होने के बावजूद ‘शत्रु’ शब्द का प्रयोग करना मुझे पसंद नहीं इसलिए मैंने इस शब्द का उनके लिए प्रयोग नहीं किया है। हम में से कई लोग उनकी बनावटी बातों में आ जाते हैं। लेकिन मैं आपको सावधान करता हूं कि आपकी स्थितियों को कमजोर करनेवाली जो-जो भी विरोधी स्थितियां हैं और राजनीतिक आजादी पाने के लिए जिन बातों के खिलाफ आपको अपना सेना बल जोड़ना है उनमें जो सबसे अधिक घातक शक्ति है वह है श्री गांधी। आप अगर इसे गांठ बांध लेने से चूक गए तो वह आपकी गंभीर गलती सिद्ध होगी। आपकी स्थति को कमजोर बनाने वाली दूसरी बात होगी अंग्रेज सरकार की नीयत में आया बदलाव। 8 अगस्त, 1940 के सार्वजनिक बयान तक अंग्रेज सरकार का नजरिया था कि अस्पृश्य हिंदुओं से अलग घटक है और इतना महत्वपूर्ण अलग घटक है कि संविधान में किसी प्रकार का बदलाव उनकी सहमति के बगैर लागू नहीं किया जा सकता। लेकिन सर स्ट्राफर्ड क्रिप्स के साथ उन्होंने जो योजनाएं भेजी हैं उन्हें देखने के बाद लगताहै कि अंग्रेज सरकार ने हमारी ओर पूरी तरह पीठ मोड़ ली है। क्योंकि सर स्ट्राफर्ड