194 18/19.7.1942 जनतंत्र जीवित रहा तो उसके पफता जरूर मिलेंगे, लेकिन अगर जनतंत्र का खात्मा हुआ तो विनाश अटल है - नागपुर - Page 383

362 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

समीकरण निर्माण किया है। मुसलमानों की संख्या भले कितनी ही हो, और मुसलमानों की बराबरी में हैं इसलिए किसी भी राजनीतिक सुलह में मुसलमानों को आधा हिस्सा मिलना ही चाहिए इस दलित को कोई नहीं मान सकता। यह न केवल गणिती तौर पर गलत होगा बल्कि यह अस्पृश्यों के साथ-साथ सभी गैर-मुस्लिमों के कल्याण के खिलाफ होगा। मुस्लिम लीग की राजनीतिक नीतियों में आए इस बदलाव पर अगर ध्यान दें तो कहना पड़ेगा कि अस्पृश्यों ने अपना सहयोगी तो गंवाया ही, साथ ही अपना मित्र भी गंवाया है। क्योंकि अगर मुस्लिम लीग हर क्षेत्र में 50 प्रतिशत आरक्षण मांगने लगे तो उसमें और अस्पृश्यों में टकराव पैदा होगा इसमें कोई संदेह नहीं। भारतीय राजनीति में हमारी स्थिति क्या है यह मैंने आपको बताया है। साथ ही यह भी बताया कि इन स्थितियों को पलटने में कौन-कौन सी शक्तियां लगी हुई हैं। अब मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि मेरी राय में आपको कौन-कौन सी मांगे रखनी चाहिएं। अपनी इन मांगों को आप बिल्कुल साफ शब्दों में रखें यह बेहद जरूरी है। इससे आपकी स्थिति साफ हो जाएगी। हम किन बातों का, किसका समर्थन करते हैं इसका हमारे लोगों को पता चलेगा। हमारे विरोधियों को भी हमारी मांगों का नोटिस मिलेगा।

सबसे पहले हमें इस बात के प्रति आग्रही होना पड़ेगा कि भारतीय राष्ट्रजीवन में हमें पृथक और विभक्त घटक के तौर पर जाना जाए। अस्पृश्य हिंदुओं का ही एक हिस्सा हैं इस सोच का आपको पुरजोर विरोध करना होगा। पृथक घटक के तौर पर मान्यता पाने में अगर हमें असफलता मिलेगी तो हम हिंदुओं में ही रहेंगे और तब हम पर गुलामी लादी जाएगी। धीरे-धीरे हम अधोगति को प्राप्त होंगे। दूसरी बात यह कि अस्पृश्यों की शिक्षा के लिए राज्य तथा केन्द्र सरकार अपने आर्थिक बजट में एक रकम आरक्षित रखी जाए इसका संविधान में ही प्रबंध हो इस बात की हमें मांग करनी होगी। केवल प्राथमिक शिक्षा के लिए ही नहीं बल्कि उच्च शिक्षा के लिए भी आपको ऐसी मांग करनी होगी। नेतृत्व के लिए तथा सरकारी नौकरियों में बड़े ओहदे पाने के लिए अस्पृश्यों को उच्च शिक्षा की बेहद जरूरत है। तीसरी बात है सरकारी नौकरियों में अस्पृश्यों के लिए जगह तय होनी चाहिएं। ये पद न्यूनतम योग्यता के नियमों के आधार पर भरे जाएं। यह करना बेहद आवश्यक है। क्योंकि, कानून बुरे या गलत हैं इसलिए हमें यातनाएं नहीं झेलनी पड़ रहीं हमें यातनाएं झेलनी पड़ रही है बुरे प्रशासन के कारण। प्रशासन केवल हिंदुओं के हाथ में होने के कारण ऐसा हुआ है। हिंदू अपने सामाजिक पूर्वाग्रह प्रशासन में भी ले आते हैं। सिद्धांततः अस्पृश्यों को जो लाभ मिलने चाहिए वो हमेशा कोई न कोई कारण बता कर वे अस्पृश्यों को मिलने नहीं देते हैं। जब तक अच्छा प्रशासन न हो तब तक अच्छा कानून आपका कोई भला नहीं कर सकता। अस्पृश्यों में से कुछ लोग जब तक अधिकार के पद सनरकार में नहीं पाते तब तक आपको बेहतर प्रशासन नहीं मिलेगा। क्योंकि, ये लोग हिंदू अधिकारी अस्पृश्यों के साथ कैसा बर्ताव कर रहे हैं यह देखते हुए उस पर अंकुश रखेंगे। औरों को