194 18/19.7.1942 जनतंत्र जीवित रहा तो उसके पफता जरूर मिलेंगे, लेकिन अगर जनतंत्र का खात्मा हुआ तो विनाश अटल है - नागपुर - Page 385

364 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आजादी सामाजिक हो या आर्थिक। सामाजिक और आर्थिक गुलामी के कारण उनमें जो हीन भाव पैदा होगा वह कभी खत्म नहीं होगा। इसीलिए गांवों की यह रचना तोड़नी और

खत्म करनी होगी। गांव की उसी रचना के साथ हिंदुओं ने अस्पृश्यों पर गुलामी लादी है उससे मुक्ति पाने की वास्तव में इच्छा हो तो उनके लिए बस यही एक राह खुली है। केन्द्रीय सरकार की आर्थिक मदद से केवल अस्पृश्यों के लिए नई बस्तियां स्थापन करने का प्रबंध संविधान में ही किया जाना चाहिए। इस बारे में आप आग्रही रहें यह मेरी आपको सूचना है। सरकार के पास ऐतिहासिक जमीन बहुत है। अभी उस जमीन पर किसी का मालिकाना अधिकार नहीं है। अस्पृश्यों के बनाए गांवों का निर्माण करने की योजना को अमली-जमा पहनने के लिए यह जमीन आरक्षित की जा सकती है। लोगों के पास पड़ी परती जमीन भी सरकार खरीद सकती है और उसे इस काम में लगा सकती है। अभी जहां वे रह रहे हैं वहां से इन नई जगहों पर जाने के लिए तथा वहां आजाद किसानों की तरह बसने के लिए अस्पश्यों को मनाना कठिन बात नहीं हो है सकता इसमें थोड़ा वक्त लगे, लेकिन उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यह बात इतनी महत्वपूर्ण है कि संविधान के जरिए केन्द्रीय सरकार पर उसे अमल में लाने की जिम्मेदारी डालनी होगी।

एक और मुद्दा है जिसके बारे में आपको चार शब्द बताने ही होंगे। वह मुद्दा है-भारत के अस्पृश्यों के प्रमुख संगठन के रूप में काम करने वाली अखिल भारतीय स्तर के केन्द्रीय राजनीतिक संस्था की स्थापना करना। हम अब तक अपनी प्रांतीय संस्थाओं द्वारा राजनीतिक आंदोलन करते आए हैं। मैंने तो यह भी देखा है कि प्रांतों में भी कई राजनीतिक संस्थाएं हैं। किसी महत्वाकांक्षी व्यक्ति की अध्यक्ष या सचिव बनने की इच्छा होतीहै तो वह संस्था की स्थापना करता है और उस संस्था का अध्यक्ष या सचिव बन जाता है। उस संस्था का नाम तथा साथ में अध्यक्ष या सचिव के तौर पर कागज पर अपना नाम छापने से आगे कुछ और करने की जरूरत वह महसूस नहीं करता। यह असल में बेहद गैर-जिम्मेदार काम है। इसे आपको तंरंत बंद कर देना होगा। इसे बंद करने का केवल एक उपाय है और वह है प्रांतीय शाखा के साथ हमें अखिल भारतीय स्तर की एक संस्था हमें बनानी होगी और अभी आस्तित्व में जो संस्थाएं हैं उन सभी को रद्द करना होगा। आपके लिए आवश्यक शक्ति इससे आपको मिलेगी। इक्ट्ठा मोर्चा खोलने के लिए इससे सहायता मिलेगी। इस प्रकार कार्य करने की सामर्थ्य आपको प्राप्त होगी। मुझे उम्मीद है कि सुयोग्य आत्मीयता से आप इस मसले पर गौर करते हुए अमल करेंगे।

अस्पृश्यों की समस्याओं के बारे में मेरे विचार और भावनाएं मैंने आपके सामने खोल कर रखे हैं। मुझे उम्मीद है कि आप इस विषय के बारे में ध्यानपूर्वक सोचेंगे।

भाषण पूरा करने से पहले युद्ध के बारे में हमारे क्या विचार हों इस बारे में बोलना ठीक रहेगा। शुरू से ही सरकार की युद्ध की कोशिशों को हमारा समर्थन प्राप्त है। यकीनन