198 20.7.1942 राजनीतिक समता के लिए जरूरी है स्वतंत्र राजनीतिक अधिकार - नागपुर - Page 396

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पर उतारु हैं। ऐसा क्यों हैं?’’ यहां भगवान के जरिए जो जवाब दिया गया है उस पर सोचा जाना चाहिए। भगवान कहता है, ‘‘तुम इतने लीन और लजीज, गुलगुले दिखाई देते हो कि मुझे भी मोंह हो रहा है कि मैं तुम्हें खा जाऊं’’। इस कहानी के मेमने जैसी ही आज तक हमारी हालत थी। इसीलिए हर कोई हमें खा जाने का इरादा रखते थे। दुर्बलता के रूप में खुद अपने आप पर लादी लीनता कोई सद्गुण नहीं होता। मैं अहिंसा को जरूर मानता हूं लेकिन-

‘दया तिचे नाव भूतांचे पालण।

आणिक निर्दालण कंटकांचे।।’

तुकाराम महाराज के इस कथनानुसार ही। तुकाराम ने दो बातों में अहिंसा होने की सार्थ बात कही है- पहली, सभी जीवों के प्रति प्रेम और दया भाव रखना_ दूसरी, दुष्ट लोगों का नाश करना। अहिंसा के इस दूसरे पक्ष की ओर अक्सर नजरंदाजी हो जाती है और इसी कारण अहिंसा का सिद्धांत हास्यास्पद हो जाता है। बुरे का नाश करना अहिंसा तत्व का महत्वपूर्ण घटक है। उसके बगैर अहिंसा यानी केवल छिलके। केवल कल्पना का सुख। व्यवहार में इस्तेमाल योग्य वह कहीं बचता नहीं। जब तक दूसरों को दुख पहुंचाने की दुष्ट इच्छा हम नहीं पालते और जब तक केवल दुष्टों के नाश तक ही अपने को सीमित नहीं करते तब तक शक्ति की उपासना के खिलाफ और शक्ति के संगठन के खिलाफ हम शिकायत नहीं कर सकते। विवेक से नियंत्रित शक्ति हमारा आदर्श है। किसी भी तरह की आलोचना पर ध्यान देने की आपको कोई जरूरत नहीं है।

अविचार से किसी को भी दुख से बचें। जिसे तुम्हारी मदद की आवश्यकता हो उसकी हर तरह से मदद करें। इस तरह आप हमारे लोगों की बड़ी सेवा करेंगे। आज तक आपका काम मुख्यतया हमारे राजनीतिक जीवन को सहारा देना ही रहा है। इसके अलावा आपके कार्य के विस्तार के लिए कई और क्षेत्र हैं। शहर में अक्सर सुनने में आता है कि कोई बदमाश महिला को अगवा कर ले गए। गांवों में हिंदू जाति से हमारे लोगों पर अत्याचार की बातें हमेशा सुनने में आती हैं। आपकी शक्ति यहां काम आ सकती है। केवल आपके तरह का संगठन ही सहायता कर पाएगा ऐसे ये हालात हैं।

मुझे खुशी है कि आपने अखिल भारतीय दलित वर्ग स्वयं सेवक दल के अधिवशन का निर्णय लिया। यह बड़े आनंद की बात है। वह अगर सफल हो तो उसके परिणाम अत्यंत हितकारी होंगे। मैं आपके सुयश की कामना करता हूं।

यहां मुझे अपने चार शब्द कहने का मौका देने के लिए मैं आपके और आपके अध्यक्ष के प्रति आभार प्रकट करता हूं।