199 21.7.1942 तीन बातें मैं होने नहीं दूंगा - मुंबई - Page 397

376 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* तीन बातें मैं होने नहीं दूंगा

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने वॉयसरॉय के कार्यकारी मंडल में ** कल अधिकार ग्रहण किया। उसके बाद आज यानी 21 जुलाई, 1942 को नेशनल सीमेंस यूनियन, मुंबई की ओर से ताजमहल होटल में हुए सम्मान समारोह के समय मजदूर विभाग के मंत्री के नाते उन्होंने पहला भाषण मुंबई में दिया।

उन्होंने बताया कि वे खुद मजदूर वर्ग से हैं और जो मजदूरों की भावनाएं और आकांक्षाएं हैं वही उनकी अपनी भावनाएं और आकांक्षाएं हैं। आगे उन्होंने कहा-

जिस कार्यकारी मंडल पर आपकी नियुक्ति हुई है वह मुख्यतः युद्ध-कोशिशों के लिए है। वह लोकमतानुवर्ती पक्षों का न होकर संमिश्र तरह का है। इसलिए यहां के बहुमत पर कई बातें निर्भर हैं।

हालांकि किसी भी तरह से मैं तीन बातें निश्चित रूप से होने दूंगा। पहली-आज जो कामगारों का जीवन-स्तर है उसे घटने नहीं दूंगा और सुव्यवस्थित और सुसंस्कृत ढंग से वे जी सकें इतनी वृद्धि उसमें लाने की कोशिश करूंगा। दूसरी बात है- राष्ट्रीय युद्धों में अन्यों की अपेक्षा कामगारों पर अधिक स्वार्थत्याग का बोझ अधिक ना आए इसका ख्याल रखूंगा। तीसरी बात यह कि मुश्किल हालात में अस्थायी रूप से कुछ नियंत्रण अगर मजदूरों को स्वीकारने भी पड़ें तो मजदूरों की आजादी पर अंकुश लगाने वाले ऐसे नियंत्रणों को मैं कानून की किताब में शामिल नहीं होने दूंगा। उन्होंने इस बात का आश्वासन भी दिया कि कभी अगर मालिक और मजदूर में कोई झगड़ा हो तो हमारी सहानुभूति मजदूरों के साथ ही होगी।

नेशनल सीमेंस यूनियन की ओर से डॉ. अम्बेडकर का सम्मान करते हुए मि. मिर्जा अख्तर हुसैन और खा. ब. महंमद इ. साईत ने हिंदी खलासियों की मुश्किलें, कठिनाइयां और शिकायतें उनके सामने व्यक्त की थीं। उन्हें जवाब देते हुए डॉ अम्बेडकर ने सूचना की कि वे उनकी शिकायतें अधिकृत ढंग से भेजें। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान का किनारे पर कभी भी दुश्मन का हमला हो सकता है इसलिए सुरक्षा के नजरिए से इस देश के

खलासी और नाविकों को सैनिकों से अधिक महत्व प्राप्त है।

इस सम्मान समारोह में कई प्रतिष्ठित, आमंत्रित और स्थानीय अधिकारी उपस्थित थे।

* दै. नवा काल, मुंबईः 23 जुलाई, 1942

* * 20 जुलाई, 1942 के दिन वॉयसरॉय का दूत संदेश लेकर बाबासहेब अम्बेडकर से मिलने नागपुर आया

उसी दिन उन्होंने तार भेज कर खबर दी कि उन्होंने श्रम मंत्रालय का कार्यभार सम्भाला है। संदर्भ-

डॉ. अम्बेडकर लाइफ एंड मिशन, लेखक धनंजय कीर, 3 रा. संस्करण, पृष्ठ 353