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* केवल स्वराज मिलने में फायदा नहीं, महत्वपूर्ण यह भी है कि
वह किसके हाथ में रहेगा
इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर के सामने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ।
अपने भाषण में उन्होंने कहा-
हिंदी मजदूर आंदोलन आमूलाग्र खोखला है। यह आंदोलन केवल सतही तौर पर चल रहा है। इसीलिए मजदूर नेता आत्मनिरीक्षण कर इस आंदोलन के संगठन में जो दोष हैं उसे हटा दें। मजदूर आंदोलन का असल उद्देश्य देश में ‘मजदूर सरकार’ की स्थापना करना है। पूंजीपति मालिकों के आगे विनती करने वाला या अर्जी देने वाला संगठन मजदूर आंदोलन नहीं है। इससे मजदूरों से अधिक पूंजीपतियों का संगठन होने की अधिक संभावना है। आज तक कभी सुनने में नहीं आया कि किसी मजदूर नेता ने मजदूरों की सरकार स्थापन करने की घोषणा की हो। अन्य राजनीतिक संगठनों से मजदूर संगठन अपने को अलग कर ले और विचार तथा कृति के जरिए अपनी संगठित आजादी स्थापित करें। मजदूर आंदोलन अपनी आकांक्षाएं स्पष्ट रूप से व्यक्त करे। केवल मजदूरों के हित के लिए देश की बागडोर अपने हाथ में लेने के लिए मजदूर नेता कटिबद्ध हों। केवल ‘स्वराज’ पाकर कुछ फायदा नहीं, ‘स्वराज’ किसके हाथ जाएगा यह अधिक महत्वपूर्ण है।
* नवयुग, 16 मई, 1943
अंक में सभा की तारीख और स्थान नहीं दर्शाया है-संपादक