378 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* ....तो सुसंस्कृत और सुखी जीवन प्राप्त होने का व्यक्ति का
मूलभूत अधिकार प्रस्थापित होगा
महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स में भाषण देते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-
साम्राज्य लोभ, वर्णद्वेष और दरिद्रता ये तीन बड़ी अड़चनें हैं जो दुनिया में हमेशा के लिए शांति प्रस्थापित होने की राह के अड़ंगे हैं। राष्ट्र की सामर्थ्य बढ़ाना पहले दो अड़ंगों से निजात पाने का उपाय है। दुर्बल राष्ट्र के हमेशा गुलामी में ही रहना पड़ता है। इसीलिए दुर्बल देशों को सामर्थ्यवान बनना होगा। पश्चिमी देशों की आर्थिक वर्चास्विता के कारण वर्णवर्चास्विता निर्माण हुई है। हिंदुस्तान के सुप्त औद्योगिक और आर्थिक सामर्थ्य का संपूर्ण विकास कर वर्णविद्वेश की समस्या से पार पाया जा सकता हे। युद्धोत्तर दुनिया में दरिद्रता की समस्या बनी रहेगी यह संभव नहीं है। औद्योगिक क्षेत्र में आमूलाग्र क्रांति होगी और उससे धन जोड़ने के हक से अधिक व्यक्ति को सुसंस्कृत और सुखी जीवन मिलने का मूलभूत अधिकार पहले प्रस्थापित होगा।
* नवयुगः 16 मई, 1943
अंक में सभा की तारीख नहीं दर्शाई है- संपादक