202 17.9.1943 सरकार पर कब्जा करना कामगारों का लक्ष्य हो - दिल्ली - Page 400

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* सरकार पर कब्जा करना कामगारों का लक्ष्य हो

‘द इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर’ संस्था की ओर से 8 से 17 सितम्बर, 1943 दरमियान दिल्ली में ‘द ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन वर्कर्स स्टडी कैंप’ आयोजित किया गया था। 17 सितम्बर, 1943 को हुए इस कार्यक्रम के आखिरी सत्र में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने भाषण किया। उन्होंने अपने भाषण में कहा-

आपके सचिव साहब ने मुझसे कहा कि मैं आपसे दो शब्द कहूं इसका मुझे बहुत आनंद है। दो वजहों से मैं इस उधेडबुन में था कि मुझे यह आमंत्रण स्वीकारना चाहिए या नहीं। ऐसा है कि सरकार के लिए वचनकारी हो ऐसा कुछ मैं बोल नहीं पाऊंगा। दूसरी बात यह है कि, कामगारों की आर्थिक मांगों के जिस मसले में आपकी दिलचस्पी है उसके बारे में भी मैं बहुत कम बोल पाऊंगा। सच बताऊं तो मेरे हां कहने तक आपके सचिव वहां से हिलने के लिए ही तैयार नहीं थे इसीलिए मैंने हां कही। जाहिर है कि मुझे यह भी लगा था कि श्रमिक आंदोलनों के बारे में मेरे मन में जो विचार आते हैं उन्हें व्यक्त करने का यह अच्छा मौका है। और कामगारों के आर्थिक मसलों को लेकर होने वाले आंदोलनों में ही जिनकी दिलचस्पी होती है उन्हें भी मेरी राय का हो सकता है कुछ हिस्सा सही लगे।

हालांकि इस मसले का आज का स्वरूप जानने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा। मानव समाज की शासन प्रणाली में कई महत्वपूर्ण फर्क आए हैं। एक जमाना ऐसा था कि जब जुल्मी राजाओं की अनियंत्रित सत्ता ही सरकार का एकमात्र स्वरूप था। कई सालों के खूनी संघर्ष के बाद हालात बदले और संसदीय जनतंत्र आय। यह पद्धति सभी शासन प्रणालियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती थी। विश्वास था कि हर मानव को आजादी, संपत्ति और सुख प्राप्त करने का अधिकार देने वाला सहस्त्रक हम निर्माण करने जा रहे हैं। इस उम्मीद को जगाने वाले कुछ कारण भी थे। जनता की अव्यक्त इच्छाओं को मूर्त स्वरूप देने वाला विधिमंडल इस पद्धति में है। उसके लिए जिम्मेदार कार्यकारी मंडल है और उससे परे इन दोनों पर ध्यान रख कर उन पर नियंत्रण रखने वाला न्याय मंडल भी है। विधिमंडल और कार्यकारी मंडल नियंत्रण रखते हुए उन्हें अधिकार क्षेत्र में रखने के लिए न्यायपालिका है। ‘लोगों की, लोगों द्वारा लोगों के लिए चलाई गई सरकार’ आदि

* श्री रमेश शिंदे के सौजन्य से प्राप्त एक छपा हुआ पत्रक। प्रकाशक मणिबेनकारा, स्वागतध्यक्ष, वार्षिक

परिषद, हिंदी कामगार फेडरेशन, रतिलाल मेंशन, पारीख स्ट्रीट, गिरगांव, मुंबई-4