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* सावधानी बरतें, बहकावे में ना आएं
अखिल भारतीय अस्पृश्य समाज के एकमात्र नेता और स्वतंत्र लेबर पार्टी के संस्थापक डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर, एमए पीएडी, बार एट लॉ दिनांक 25 जनवरी, 1937 की रात साढ़े तीन बजे जलगांव स्टेशन पहुंचे। सोलापुर और नगर जिले के दौरे पूरे कर वे आए थे। उनके साथ थेखानदेश पूर्व के स्वतंत्र लेबर पार्टी के उम्मीदवार श्री दौलतराव गुलाजी जाधव, बी.ए.। जामनेर पहुंचने के बाद उनका बड़ा जुलूस निकाला गया। जुलूस आखिर सभा में परिवर्तित हुआ तब उस सभा को संबोधित करते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा- ‘आप जानते हैं कि मैं आज दौरे पर क्यों निकला हूं। सुधारित कानून के अनुसार मुम्बई विधिमंडल में 15 उम्मीदवारों को चुनने का आपको अधिकार मिला है। राज्य संविधान के अनुसार स्थापन होने वाली लेजिस्लेटिव एसेंबली में कुल 175 सदस्य होते हैं। उनकी तुलना में हमारे उम्मीदवारों की संख्या कम होती है और वे अगर एकजुट होकर नहीं रहे तो अपना हित नहीं होगा। सभी लोग अगर एकजुट होकर रहने चाहिए तो उन्हें किसी न किसी पार्टी के साथ जुड़ना होगा। आपके जिले में हमारे पक्ष से मैंने श्री जाधव को चुना है। उनके विरोध मेंखड़े श्री मेढे और श्री बिन्हाडे कितने लायक हैं, यह आप सब लोग जानते हैं। आगे जाधव अगर आपकी मर्जी के अनुसार नहीं बरतेगा तो मैं उसके लिए जिम्मेदार रहूंगा लेकिन श्री मेढे के म ामले में आप किसे जिम्मेदार ठहराएंगे? दूसरी बात यह कि विधि मंडल में सभी काम अंग्रेजी में चाहते हैं इसलिए आपकी शिकायतें वहां सबके सामने रखने के लिए अंग्रेजी जानने वाला इंसान चाहिए। इसीलिए श्री जाधव ही केवल लायक हैं। श्री जाधव मेरा कोई रिश्तेदार नहीं है। अन्य उम्मीदवार भी मेरे दुशमन नहीं हैं। लेकिन जिस काम के लिए जो लायक व्यक्ति होता है उसको नियुक्त करना मेरा कर्त्तव्य है। आपको यह अधिकार ना मिले इसलिए गांधी जैसे लोगों ने आमरण अनशन शुरू किया था। लेकिन उन्हें दरकिनार कर हमने यह अधिकार हासिल किया है। इस हक को सही इस्तेमाल करना अब आपके हाथ में है। आपको शिकार बनाने के लिए, आपको लुभाकर वश में करने के लिए कुछ लोग बो²डगखोलते हैं, कुछ चाय पिलाते हैं, लेकिन ये सभी उपाय कुछ देर तक टिकने वाले ही हैं। इतने भर से हमारा उद्धार नहीं होने वाला। हमें अभी बहुत-कुछ हासिल करना है। और वह सब हासिल करना हो तो आपको बड़ी सावधानी से बरतना होगा। कुछ मास्टरजी श्री मेढे की मदद करते हैं यह मैंने सुन रखा है। पता
* जनताः 1 फरवरी, 1937