384 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पनपा। पिछले 20 वर्षों की यह कमी कामगारों के दल से पूरी होगी।
हिंदी श्रमिकों को एक और बात सीखनी होगी। उन्हें जानना होगा कि ‘बिन ज्ञान सब शून्य’ ज्ञान के बगैर कोई सामर्थ्य नहीं। वे जब अपना मसला लेकर लोगों के सामने जाएंगे तब लोग उनसे यह जरूर पूछेंगे कि क्या राज चलाने की उनमें काबिलियत है? उस वक्त यह जवाब देकर काफी नहीं होगा कि हमसे ज्यादा से ज्यादा उतनी ही गलतियां होंगी जितनी बाकी लोगों से होती रही हैं। उन्हें दूसरे आगे जाकर यह साबित करना होगा कि ऊंचे वर्ग से भी वे अधिक कुशल राजनीतिज्ञ हैं। कामगारों की शासनप्रणाली अन्य वर्गों की तुलना में मुश्किल ही होगी क्योंकि आर्थिक योजना की बुनियाद पर बनेगा। अन्य पद्धतियों से इसमें ज्ञान की जरूरत अधिक है। दुर्भाग्य यह है कि हिंदी श्रमिकों को अब तक पढ़ाई की जरूरत का अभी तक पता नहीं चला है। मिल मालिकों को गालियां देने के अलावा श्रमिक कार्यकर्ताओं ने अभी तक कुछ सीखा नहीं है।
इस कमी को पूरा करने के लिए पढ़ाई-मंडल स्थापन का काम किया है इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर ने यह बड़ी संतोषजनक बात है। इसी के सहारे श्रमिकों में राज चलाने की काबिलियत पैदा होगी। कामगारों का पृथक पक्ष स्थापन करने की जरूरत से इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर सहमत होगा। मुझे यही उम्मीद है। श्रमिकों में शासकों की योग्यता निर्माण करने के लिए वे फेडरेशन को धन्यवाद देंगे।