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* हर जगह समता सैनिक दल की शाखाएं स्थापन कर अपनी
शक्ति बढ़ाएं
अखिल भारतीय समता सैनिक दल का दूसरा अधिवेशन कानपुर में रविवार, 30 जनवरी, 1944 की सुबह हुआ। अध्यक्ष स्थान पर थे श्री बी. के. गायकवाड़। परिषद में मुंबई, महाराष्ट्र, मध्यप्रांत, गुजरात, पंजाब, बंगाल, मद्रास, संयुक्त प्रांत साथ ही हैदराबाद, ग्वालियर, कोलहापुर, इंदौर, उज्जैन आदि रियासतों से सैंकड़ों प्रतिनिधि आए थे। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर श्री शिवराज, महासचिव श्री पी. एन. राजभोज, प्यारेलाल कुरील तलीब आदि नेताओं के भाषण हुए।
सबसे पहले नागपुर के श्री आर. आर. पाटील ने समता सैनिक दल की मुंबई और नागपुर शाखाओं में हो रहे कार्य की जानकारी देने वाली रिपोर्ट पढ़ी। उसके बाद परिषद के अध्यक्ष श्री भाऊराव गायकवाड़ का भाषण हुआ। उनके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ जिसमें उन्होंने कहा-
समता सैनिक दल के मेरे शूर सैनिकों,
आज संयुक्त प्रांत में दल का यह दूसरा अधिवेशन हो रहा है। पिछले 17 सालों से मुंबई और मध्य प्रांत में दल का काम बड़े जोरों से चल रहा है। इन दोनों प्रांतों में समता दल के दस हजार से अधिक श्रेष्ठ सैनिक खड़े हैं। कुछ साल पूर्व तक मेरे मुंबई प्रांत में हमारे अथवा अन्य पक्षों की सार्वजनिक सभाएं काँग्रेस के गुंडे भंग कर दते थे। 1927 में मेरे हाथों इस दल की स्थापना की गई। उस दिन से आज तक हमारी सभा में काँग्रेस के गुंडे या किसी मवाली ने घुसने की हिम्मत नहीं की है। एक बार मेरे दफतर के सामने विरोधी पार्टी की बड़ी सार्वजनिक सभा हो रही थी। उस सभा में हमारी पार्टी के सैनिक गए और उन्होंने वहां की बत्तियां, टेबल-कुर्सियां उठाईं और लाकर मेरे दफतर में डाल दीं। अभी भी वह समान मेरे पास वैसे ही पड़ा हुआ है। वे चीजें हमारे सैनिकों के कार्य का प्रतीक हैं। बताने का केवल यही उद्देश्य है कि हमारे सैनिक इतने अधिक रौबदार और कर्तृत्ववान हैं। वे जब ठान लेते हैं तब उनको सोंपी गई जिम्मेदारी को पलक झपकने की देर में पूरा कर देते हैं इसका मुझे विश्वास है। इसीलिए लक्ष्य के लिए समर्पित इस दल की शाखाएं हर प्रांत में, हर शहर में, गांवों में स्थापन कर हमें अपनी शक्ति बढ़ानी चाहिए।
* 6 जनवरी, 1945