388 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
रस उंडेलें और अगर वे उसका उच्चारण करते हैं तो उनकी जीभ काटें। शंबूक अस्पृश्य था इसलिए राम ने उसे मार डाला। उसी राम को हिंदू धर्म भगवान मानता है! और आश्चर्य की बात तो यह है कि जिस धर्म ने इतनी उपेक्षा की, जिस धर्म ने इंसानियत से हमेशा के लिए हमें अलग कर दिया उसी धर्म के साथ हमारे कुछ लोग चिपके हुए हैं। हमारा घर-बार लुट गया है और हम गंगा स्नान करते बैठे हैं। हमें अगर अपनी बुरी हालत से पार पाना है तो हमें हिंदू धर्म को त्यागना होगा हिंदू धर्म को छोड़े बगैर हमारा दुख कभी नष्ट नहीं होगा।
व्यावहारिक जीवन में हमें यह सोचना है कि हम कैसे जी सकते हैं। भावी स्वराज में शासक समुदाय बनना हमारा लक्ष्य है। हम चाहते हैं कि स्वराज सबका हो- औरों का भी और हमारा भी। सभी को शिक्षा और नौकरियां मिलेंगी। आज कामगार को कोई सुख नहीं। उसके बदन पर ठीक कपड़े नहीं हैं। आधा पेट रहना पड़ता है और उनके रहने के लिए ढंग के घर नहीं हैं। कामगारों का आज जो ऐसा हाल है उसमें बदलाव आना चाहिए। राजनीतिक सत्ता अगर हमारे हाथ आए तो हर कामगार को हम न्यूनतम 30 रुपए तनख्वाह करेंगे। हमारे राज में कामगारों को रहने के लिए अच्छे घर मिलेंगे और कामगार को पेंशन मिलेगी। हमारे राज में बीमारी का भत्ता दिया जाएगा। और कोई बेकार नहीं रहेगा। लेकिन ब्राह्मण लोग सत्ता हमारे हाथ नहीं आने देते। मुसलमानों का राज था तब ब्राह्मणों ने ‘अल्ला हो अकबर’ कहते हुए दिन बिताए। आज वे अंग्रेजों की सेवा में लगे हैं। अंग्रेजों की जय बोल कर ब्राह्मणों ने सभी महत्वपूर्ण पदों पर कब्जा किया है। इन हालात को नष्ट करते हुए हमें सत्ता को अपने हाथ में लेना है। उसके लिए हमें अपनी सामर्थ्य बढ़ानी होगी। हमारे दल के पास काँग्रेस की तरह संपत्ति नहीं है। स्वराज में हम पर किसी और का राज होगा। उसके लिए पूरा मनुष्यबल इक्ट्ठा कर हमें अपनी सामर्थ्य बढ़ानी होगी। हिंदू लोगों का एक अलग गुट है। मुसलमानों का एक अलग समूह है और हमारा समूह भी अलग से है। इस प्रकार इस देश में तीन प्रमुख अलग-अलग गुट हैं। इस देश की सत्ता को इन तीनों गुटों में समान रूप से बांटना होगा। सत्ता के समान बंटवारे के बगैर इस देश में स्वराज नहीं आएगा। अंग्रेज मुसलमानों को बड़ा (समूह) मानते हैं और उन्हें सरकार से रियायतें भी मिलती हैं। आज की तारीख में मुसलमानों की मांग है- पाकिस्तान या 50 प्रतिशत कांग्रेस के लोग बाहर आएंगे और मुसलमानों को 50 प्रतिशत देंगे। लेकिन हमारी मांगे हमें अपनी सामर्थ्य दिखाए बगैर नहीं मिलेंगी। काँग्रेस और मुसलमानों को नहीं लगता कि अस्पृश्यों की मांगें पूरी हो। इसीलिए मैंने अखिल भारतीय शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन की स्थापना की है। अब हिंदूस्तान के सभी अस्पृश्य लोगों को इक्ट्ठा होकर संग्राम के लिए तैयार होना चाहिए।
सम्मान पाने और नेता बनने के कई लोग लालची हैं। फाइलों में या कागजों में