204 30.1.1944 सत्ता के समान विभाजन के बगैर स्वराज क्या मतलब? - कानपुर - Page 410

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नेता बनना नहीं लिखा होता। अखबारों में नाम छपने से कोई व्यक्ति नेता नहीं बनता। सी.आई.डी. का दफतर बहुत बड़ा है। उसमें हर नेता के कार्य की डायरी रखी जाती है। आपके नाम से ऐसी डायरी बननी चाहिए। सच्चा काम कीजिए। अपने हकों को पाने के लिए जान की बाजी लगाएं। गवर्नर का नेता का डर लगना चाहिए। नेता का कहना नहीं माना तो वह जिस समाज का नेता है वह समाज अपने सिर पर जूते मारेगा इस बात का गर्वनर को डर लगना चाहिए। उसी को सच्चा नेता कहा जा सकता है।

अस्पृश्य समाज में एका नहीं। अस्पृश्य लोग आज भी आपसी छुआछूत मानते हैं। यह प्लेग ब्राह्मणों से अधिक हममें है। जातिधर्म हममें से नष्ट होना चाहिए। मैं जातिभेद को नहीं मानता। जो जाति मानता है वह नेता नहीं बन सकता। पिछले 25 सालों का यह मेरा अनुभव है।

समता सैनिक दल हमारी राजनीतिक पार्टी की सामर्थ्य है। लड़ने वाले सैनिकों के बगैर कोई पार्टी सामर्थ्यवान नहीं बनने वाली हमें तो बड़ी-बडी़ संस्थाओं से टक्कर लेनी है। इसीलिए हमें समता सैनिक दल को बढ़ाना होगा। समता सैनिक दल को बढ़ाना हर नेता का कर्तव्य है। कानपुर और अन्य सभी जगहों पर एक दल की स्थापना करो। हर महीने दल के सदस्यों से एक आने का चंदा लीजिए। हमारी मुंबई में समता सैनिक दल का काम जोरों से चल रहा है। परिषद के बाद हमारा काम ठंडा पड़ता है, उसे ठंडा ना पड़ने दें। हमारा काम निरंतर चलते रहना चाहिए। लोगों को जागरूक बनाएं। युवको को संगठित बनाएं।

कई संस्थाओं से मुझे मानपत्र दिए गए हैं। मैं उनको धन्यवाद देता हूं। लेकिन मुझे वे मानपत्र नहीं चाहिए। मैं बस काम करना चाहता हूं। अगर सम्मान पाने के लिए मैं काम करता तो आज काँग्रेस का अध्यक्ष बनता। मैं आपसे यही कहना चाहता हूं कि काम कीजिए तो सम्मान आपको खोजते हुए आएगा।

अस्पृश्य समाज को राजनीतिक अधिकार दिलाने का काम मैं कर रहा हूं। कई लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं पूरे देश की आजादी का काम क्यों नहीं करता? पंडित जवाहरलाल नेहरू को देश के लिए काम करने के लिए हजारों कॉलेज छात्र मिल सकते हैं। लेकिन अस्पृश्यों का काम करने के लिए पंडित नेहरू का कोई छात्र नहींआएगा। फिर यह काम कौन करेगा? यह हमारा काम है, इसे हमें ही करना पड़ेगा। देश का काम करने के लिए बहुत सारे लोग है। अस्पृश्यों के लिए हमारे सिवा कोई नहीं। मैं तो यही काम करता रहूंगा। जिस काम में आठ करोड़ पद-दलितों का, शोषितों का उद्धार होना है, वह असल में स्वराज पाने का कार्य है।

छात्रों ने मुझे जो मानपत्र दिया है उसके लिए मैं उनके प्रति धन्यवाद प्रकट करता