204 30.1.1944 सत्ता के समान विभाजन के बगैर स्वराज क्या मतलब? - कानपुर - Page 411

390 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हूं। अस्पृश्य छात्रों से मैं एक सवाल पूछना चाहता हूं। उपाधि पाने के बाद नौकरी मिलेगी तो उसके बाद आप अपने समाज के लिए क्या करेंगे? अपने परिवार में ही खो जाने के बजाय जिस समाज से हम आए हैं उस समाज की स्थिति अब क्या है इस बात को लेकर सोचना होगा। उस समाज के लिए जहां तमक संभव हो सके अपनी तनख्वाह से जितना हो सके पैसा देने चाहिए। हिंदुस्तान सरकार से हर साल अपने छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए मैंने तीन लाख रुपए मंजूर करवाए हैं। उसका खूब इस्तेमाल कीजिए। महत्वपूर्ण ओहदों पर कब्जा कीजिए। आप अगर इस सुविधा का लाभ नहीं उठाएंगे, महत्वपूर्ण पद तक नहीं पहुंचेंगे तो आगे चल कर आप ही पछताएंगे। दूसरी बात जो मैं अस्पृश्य पढ़े-लिखे लड़कों के बारे में देखता हूं वह यह कि वे अपने समाज की लड़कियों से शादी नहीं करते। बताएं, उनके साथ फिर कौन शादी करेगा? हमें इस बारे में सोचना चाहिए।

मैं आप सब लोगों से कहना चाहता हूं कि हमने जो लड़ाई शुरू की है वह बहुत बड़ी है। पवित्र है। अपने समाज की उन्नति के बगैर हमें यह लड़ाई रोकनी नहीं है।