392 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सेवा हॉल’ ले जाया गया। इस केन्द्र के जरिए जनता की सेवा की जाती थी। बाबासाहेब को बताया गया कि किसी भी गरीब इंसान की अगर कोई शिकायत हो तो उसकी मुफत में मदद करने के लिए यह केन्द्र खोला गया था। यहां से होते हुए जुलूस विस्तीर्ण जीरा मैदान की ओर निकला। वहां बहुत बड़ा शामियाना ताना गया था। पूरा मैदान लोगों से भर गया था। महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। इस अवसर पर स्वागत समिति के प्रमुख प्रेमकुमार ने बाबासाहेब का स्वागत किया। शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन की ओर से जे. एच सुबय्या ने बाबासाहेब को मानपत्र अर्पण किया।
बाबासहेब अम्बेडकर भाषण के लिए खड़े हुए तो जनसागर में तालियों की बड़ी लहर उठी। बाबासाहेब करीब 45 मिनटों तक हिंदुस्तानी भाषा में बोले। अपने भाषण से उन्होंने लोगों को बेहद प्रभावित किया। बाबासाहेब का प्रभावपूर्ण भाषण, दिल को छू लेने वाली भाषा, गरीबों के साथ एकरूप होने का उनका मनोभाव, शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के झंडे के नीचे सबको किस प्रकार एकजुट होकर अस्पृश्यों के हक पाने के लिए कैसे लड़े इस बारे में उनका विवेचन हरेक के दिल को छू रहा था। ख्1,
डॉ. अम्बेडकर ने अपने भाषण में कहा-
अध्यक्ष महोदय और भाइयों और बहनों,
आज आप लोगों ने इतने बड़े पैमाने पर जो मेरा स्वागत किया है उसके लिए मैं आपके प्रति आभारी हूं। यहां मैं पहली ही बार आया हूं इसलिए इतने बड़े पैमाने पर स्वागत किए जाने की मैंने उम्मीद नहीं की थी। लेकिन मेरे जीवन की ओर देखता हूं तो मुझे इस बात का अचरज नहीं लगता। आज के स्वागत में, सभा में और जुलूस में युवकों ने जो उत्साह दिखाया उसके बारे में मुझे बहुत संतोष महसूस होता है। हमारे समाज का पूरा दारोमदार आज के युवाओं पर निर्भर करता है। युवा पीढ़ी द्वारा अपने समाज के लिए स्वार्थ त्याग किए बगैर हमें जल्दी अपने उद्देश्य तक नहीं पहुंच पाएंगे। यहां आंदोलन करने की रियायत होती तो मुझे लगता है कि आपका बड़ी तेजी से विकास होता ऐसा मुझे लगता है।
आज के समारोह में महिलाओं की सहभागिता विशेष रूप से उत्साहवर्धक है। मैंने देखा है कि यहां की महिलाएं बहुत अच्छा भाषण देती हैं। यहां की महिलाएं साफ-सुथरा रहना जानती हैं। यहां समता सैनिक दल की शाखा की स्थापना कर महिलाएं भी बड़े पैमाने पर उसमें शामिल हुई हैं इस बारे में मुझे संतोष है। आज मैं महिलाओं को संदेश देना चाहता हूं कि वे पुरुषों के साथ सार्वजनिक जीवन में हिस्सा ले। केवल पुरुषों के
1 समग्र अम्बेडकर चरित्रः बी. सी. कांबले, खंड 17, पृष्ठ 66-67