205 20.9.1944 किसी भी अन्य समुदाय से बढ़कर अस्पृश्यों को आजादी के बारे में आत्मीयता है - हैदराबाद - Page 414

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आगे बढ़ने और महिलाओं के पिछड़ते रहने से किसी भी समाज की प्रगति नहीं हो सकती। इसीलिए अब महिलाओं को पुरुषों के कंधे से कंधा मिला कर लड़ना होगा। तभी हमें जल्द आजादी मिलेगी।

हमारे आंदोलन का लक्ष्य क्या है? कब हम अपने आंदोलन को पूरा हुआ कह सकते हैं? हमारे समाज को और हमारे देश को आजादी मिलनी चाहिए यही हमारा लक्ष्य है। लेकिन इस देश में कई पंथ हैं। (1) हिंदु, (2) मुसलमान, (3) ईसाई, (4) अस्पृश्य। अस्पृश्य कौन हैं? अस्पृश्य जाति हिंदुओं से अलग है। हजारों सालों से हिंदु समाज ने हमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मामलों में हमें बिल्कुल गुलाम बना दिया है। हम सब गुलामी के ये बंधन तोड़ना चाहते हैं। इस देश को गणतंत्र चाहिए यह पुकार कर कहा जाता है लेकिन हिंदू समाज से मैं पूछना चाहता हूं कि क्या अस्पृश्य समाज को टाल कर क्या देश गणराज्य हो सकता है? इस गणाज्य में मुसलमानों को अधिकार मिलेंगे, ईसाइयों को अधिकार मिलेंगे लेकिन हमें अपने अधिकार कभी नहीं मिलेंगे इस प्रकार का षड्यंत्र रचने में हिंदू मश्गूल हैं। हम न उनके रिश्तेदार हैं, न सगे हैं। उन पर हम कैसे भरोसा रखें क्योंकि वे हमें अपने अधिकार देंगे इसका हमें भरोसा ही नहीं है। लेकिन हम उनके भाईबंद नहीं है। मि. जिन्ना ने पहले अल्पसंख्यकों का पक्ष लिया था। लेकिन अब वे मुस्लिम लीग की ओर से पाकिस्तान की मांग कर रहे हैं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के हित की लड़ाई से उन्होंने खुद को अलग कर लिया है। अब वे केवल मुसलमानों की हितसाधना करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि अधिक से अधिक और कभी मौका मिले तो अन्य अल्पसंख्यकों के हक छीन कर खुद अधिक सत्ता हथियाने की उनकी कोशिश है। इसीलिए हम कहते हैं कि न केवल हिंदू बलिक मुसलमान भी हमारे खिलाफ हैं।

कांग्रेस और गांधी ने हमें किसी प्रकार के अधिकार न मिलें, हमारा कोई पृथक अस्तत्व न बने, इस देश में हम सम्मान के साथ न रहें, हमें राजनीतिक क्षेत्र से हमेशा के लिए नष्ट कर हजारों सालों से हमारे पैरों में जो बेडि़यां पड़ी हुई हैं उन्हें और कसने की कोशिश की है। वे चाहते हैं कि कभी हमारा सिर ऊंचा न उठे और हम हमेशा उनके गुलाम बन कर जिएं। ब्रिटिश सरकार हिंदू मुसलमानों को हम बताए देते हैं कि देश की सत्ता में हमें उत्तराधिकार चाहिए। उसके लिए हम लड़ेंगे, मरेंगे। अत्याचार में हमारा विश्वास नहीं। हम अत्याचारों से डरते नहीं। ब्रिटिश सरकार, हिंदू, मुसलमान और अन्य समुदायों को पता चलना चाहिए कि जिसमें हिंदू, मुसलमान और अस्पृश्य वर्ग के प्रतिनिधि होंगे उसे ही राष्ट्रीय सरकार कहा जा सकता है। अस्पृश्य हिंदू समाज के घटक नहीं हैं। वे एक अलग राष्ट्र हैं। अपने लक्ष्य की साधना के लिए, आंदोलन करने और लड़ने के लिए अस्पृश्य वर्ग तैयार है।