394 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आपकी मांग बहुत बड़ी है। अपनी राह में कई संकट हैं। हमारे कई शत्रु हैं। इन सबसे निपटने के लिए हमें अपन संगठन खड़ा करना होगा। हम अगर संगठन बनाएंगे तो गांधी, जिन्ना, सावरकर हमें अपने अधिकार देने से इंकार नहीं कर सकते। सरकार के आगे जाना कमतरी का है। आज हमें अपना संगठन बढ़ा कर अपनी मांगे मानने पर उन्हें मजबूर करना है। हमारी शक्ति बढ़े बगैर हमें कुछ नहीं मिलेगा।
‘‘हिन्दुस्तान की आजादी को लेकर अस्पृश्यों के मन में कोई आस्था नहीं है’’- इस प्रकार बदमाशी भरा, निदंनीय और दुष्ट प्रचार काँग्रेस तथा राष्ट्रीय अखबारों के जरिए किया जाता है। हम राष्ट्र विरोधी देश को डुबोने वाले हैं इस प्रकार के हमले हम पर किए जाते हैं। अस्पृश्यों को इंसानियत, समता चाहिए, औरों की बराबरी का राजनीतिक दर्जा चाहिए। हमारा समुदाय को भी इस देश का शासक समुदाय बनना चाहिए। इस दिशा में चल रहा हमारा आंदोलन उन्हें अगर देश को डुबोने वाला लगता है। तो उनके कथन पर मुझे अचरज बिल्कुल नहीं लगता। अन्य किसी भी समुदाय की तुलना में अस्पृश्यों के मन में पलने वाली देश की आजादी के प्रति आस्था कम नहीं है। उल्टे वह अधिक ही है। लेकिन देश की आजादी के साथ-साथ हमें अपने समाज की आजादी भी चाहिए। ख्2,
2 जनताः 2 दिसम्बर, 1944