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* मालिकों के अधिकतम मुनाफे की सीमा निर्धारित करने की नीति
केन्द्र सरकार को अपनानी चाहिए
कुमारराज सर मुथिमा चेट्टीमार ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को 22 सितम्बर, 1944 को शाम अडयार (मद्रास) के अपने ‘चेट्टिमाड हाऊस’ राजमहल के विस्तृत मैदान में चाय पार्टी दी। मद्रास सरकार के बड़े अफसर, जज और प्रमुख नागरिक आदि 200 लोगों को आमंत्रित किया गया था। जजमान और मेहमानों के साथ बाबासाहेब की
खूब बातचीत हुई और समारोह संपन्न हुआ। आधे घंटे बाद डॉ. बाबासाहेब को सदर्न इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स संस्था में सम्मानित किया गया। उसमें संस्था के वक्ता ने कहा कि अगर सरकार मजदूर आंदोलन पर पाबंदी नहीं लगाती तो देश में औद्योगिक और व्यावसायिक उन्नति नहीं हो सकती।
डॉ. बाबासाहेब ने इसका जवाब देते हुए कहा-
कामगारों के संदर्भ में कानून बनाने के सारे अधिकार प्रांत सरकार को दिए गए हैं। केन्द्र सरकार बस इनकी देखरेख करेगी। इस संदर्भ में कानून बनाते हुए प्रांत सरकार मजदूर और मालिक दोनों के लिए हितकर कानून बनाए। आगे जब केन्द्र सरकार आएगी तब इस मामले में सुयोग्य नीति अपनाई जाएगी लेकिन मेरी राय में इस सरकार को मजदूरों का न्यूनतम वेतन तय करने की नीति नहीं बल्कि मालिकों के मुनाफे की अधिकतम सीमा निर्धारित करने की नीति अपनानी चाहिए। कामगारों की बीमारी में उनकी हर तरह से मदद करने की योजनाएं बनानी चाहिए। केन्द्रीय मजदूर विभाग ने उन्हें यही सलाह दी है। मालिक और मजदूरों के बीच के झगड़ों को आपसी बातचीत से, सामोपचार से मिटाएं, दोनों के बीच सौहार्द बना रहे इसलिए जल्द ही सरकार सभी ब्रिटिश सीमाओं में तीन बड़े अधिकारियों (कमिश्नर्स ऑफ कन्सीलिएशन) की नियुक्ति करने जा रही है। अब तक सरकार द्वारा 68000 लोगों को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रोजी-रोटी कमाने लायक बना दिया गया है। तकनीकी शिक्षा के प्रचार-प्रसार की व्यवस्था सरकार करने जा रही है। युद्ध समाप्ति के बाद शुरू होने वाले औद्योगिक आंदोलन इन प्रशिक्षित तकनिशियनों का भरपूर उपयोग होगा।
* डॉ. भी. रा. अम्बेडकरः चरित्रः ले. चां. भ. खैरमोडे, खंड 9, पृष्ठ 336