396 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* ऐसी आजादी के लिए लड़ना पड़े तो मैं हमेशा तैयार हूं
शुक्रवार, दिनांक 22 सितम्बर, 1944 की शाम मद्रास म्युनिसिपल कार्पोरेशन की ओर से चांदी के बक्से में मेयर डॉ. सैय्यद नियामतुल्ला के हाथों डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को मानपत्र अर्पण करने का बड़ा समारोह रिपन बिल्डिंग में हुआ। इस समारोह में कई प्रतिष्ठित नागरिक, सरकारी अधिकारी और कारपोरेटर्स उपस्थित थे। कांग्रेस पार्टी के कार्पोरेटर्स ने मानपत्र का विरोध किया था इसीलिए वे समारोह में अनुपस्थित रहे।
मानपत्र के लिए जवाब देते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा- अपने शहर की ओर से आप मेरा स्वागत कर रहे हैं यह आपका बड़पन्न है। मैं मद्रास शहर निवासी नहीं हूं और नागरिक जीवन में भी मैंने कभी विशेष कुछ नहीं किया है। इसलिए आपकी मेहमान- नवाजी पर वैसे मेरा कोई अधिकार नहीं पहुंचता। इसके बावजूद आप मेरा स्वागत कर रहे हैं इसके लिए मैं आपके प्रति आभार प्रकट करता हूं। किसी की आलोचना करने या खुराफत के लिए मैं कुछ नहीं कहना चाहता। बस एक सत्य घटना के तौर पर मैं उसका जिक्र करने जा रहा हूं। अखबारों में मैने पढ़ा कि मुझे मानपत्र देने के निर्णय को सभी समर्थन नहीं मिला। कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया है। (हंसी) इस बात का जिक्र करने का कारण यही है कि मैं बताना चाहता हूं कि सभी के समर्थन से मिलने से अधिक इस प्रकार मिलना ही मुझे ठीक लगता है। सभी के समर्थन से होने वाली ज्यादातर बातें हम केवल औपचारिक होती हैं इसलिए करते है। आधुनिक समाज की कुछ परंपरागत झूठी रूढि़यां - इससे अधिक इसका कोई मतलब नहीं होता। (तालियां) जो बात हुई उससे इस बात का पता चलता है कि कार्पोरेशन के एक हिस्से ने ही सही मुझे मानपत्र देने में ईमानदारी और आग्रह दिखाया।
युनिवर्सिटी के मेरे जीवन का, अध्यापक- वकील और मुंबई के वरिष्ठ विधिमंडल के सदस्य के नाते मेरे कार्य का अपने अच्छे लेकिन थोड़ा अत्युक्तिपूर्ण शब्दों में जिक्र किया है। आपने मेरे बारे में जो कुछ कहा वह सब सच मानने जितना अभिमान मुझे नहीं है। जिस उद्देश्य के लिए मैं इतने दिनों से मेहनत कर रहा हूं उसके प्रति सहानुभूति के कारण ही आप मेरा गौरव कर रहे हैं। यह मेरे निजी गौरव से अधिक इस लक्ष्य को समर्थन देने के उद्देश्य से ही इस गौरव को मैं स्वीकार करता हूं।
गरीबों की बस्ती में सुधार करने और मजदूरों के बच्चों को खाना मुहैय्या कराने
* जनताः 25 नवम्बर 1944