400 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* भारत के भावी संविधान में श्रमिकों के राजनीतिक अधिकारों को
प्रधानता देनी होगी
एम. एंड एस. एम. रेलवे एम्पलॉईज युनियन की ओर से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को पेरांबुर के अपने दफतर में आयोजित कार्यक्रम में मानपत्र दिया गया। यह कार्यक्रम 23 सितंबर, 1944 की शाम को आयोजित किया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सी. कृष्णमूर्ती कर रहे थे। शिवसुब्रमानियम ने मानपत्र पढ़ा। उस युनियन में जो अस्पृश्य श्रमिक थे उनकी ओर से दूसरा मानपत्र दिया गया, जो अध्यक्ष ने पढ़ कर सुनाया। दोनों मानपत्रों को जवाब देते हुए बाबासाहेब ने कहा,
मद्रास प्रांत बेकार धार्मिक धारणाओं का गढ़ है। लेकिन आज जिन लोगों की ओर से उस सभा का आयोजन किया गया है उनमें यूरोपियन ईसाई, एग्लो इंडियन, हिंदु, मुसलमान, अस्पृश्य ईसाई आदि धर्मों के मजदूर और अधिकारी हैं। इससे एक बात सा बित होती है कि दरिद्रता सबको बांधने वाली डोर है। आप सभी कामगार अगर एकजुट होकर रहो तो आप अपना दरिद्रता भरा जीवनखत्म करने की राह पर आगे बढ़ सकते है। महायुद्धखत्म होने के बाद भारत को अधिक राजनीतिक अधिकार मिलने वाले हैं इससे कोई शक नहीं वे हक पूरी तरह औरों के हाथ जाने के बजाय उसमें मजदूरों को भी बड़ा हिस्सा मिलना चाहिए क्योंकि राजनीतिक सत्ता के सहारे किसी वर्ग को संपूर्ण प्रगति हासिल करना आसान होता है। इसीलिए श्रमिक वर्ग को ट्रेड यूनियन के आंदोलन को जारी रखते हुए भारत को जो अधिकार मिलने वाले हैं वे उपनिवेश के हों उसके लिए आंदोलन किया जाना चाहिए। भारत के संविधान में श्रमिकों के जो हक दर्ज किए जाएंगे उनमें राजनीतिक अधिकारों को प्रधानता दी जानी चाहिए। केंद्रीय विधिमंडल में 50 प्रतिशत और प्रांतीय विधिमंडल में 30 प्रतिशत जगहें श्रमिकों के लिए आरक्षित रखी जानी चाहिएं। इसके लिए आप आंदोलन करें। मेरे पास मजदूर विभाग है। इस विभाग को सुव्यवस्थित करना चाहता हूं। मजदूरों का अधिक से अधिक कल्याण ही मेरा त्लक्ष्य है।
अस्पृश्य मजदूरों को उद्देश्य कर बाबासाहेब ने कहा, रेल, पोस्ट और तार यंत्र विभाग में 13 प्रतिशत जगहें आरक्षित रखने का निर्णय केन्द्र सरकार ने किया है। लेकिन अस्पृश्य की शिक्षा की प्रगति के कारण आठ पूर्णांक एक बटा तीन प्रतिशत जगहें अस्पृश्य वर्ग के हिस्से आती हैं। इसलिए, अस्पृश्य वर्ग में शिक्षा के क्षेत्र में त्वरित हो और पूरे 13 प्रतिशत का समाज को फायदा मिले।
* डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर चरित्रः ले. चां. भ. खैरमोडे, खंड 9, पृष्ठ 355-56