402 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रतिगामी लोगों की वर्चास्विता में हैं। वेद पढ़ने के बाद मुझे बड़ा अचरज हुआ। उसमें विदूषक के प्रलाप के अलावा कुछ भी नहीं है। (प्रचंड हंसी और तालियां) ब्राह्मणों जैसे होशियार लोग इन्हीं वस्तुओं को प्रमाण मानने की बात क्यों करते हैं? अथर्ववेद में तो केवल जादुई मंत्र हैं। (हंसी और तालियां)
इस्लाम धर्म ने इस देश में कदम नहीं रखा होता हो ब्राह्मण और बौद्धों के बीच की यह लड़ाई लंबे समय तक चलती। स्वतंत्रता, समता और बंधुता का आदेश देनेवाला दुनिया के इतिहास में बुद्ध ही पहला व्यक्ति होगा। अब वह आदेश नष् हो चुका है। आज हिंदु समाज को उसी की सबसे अधिक जरूरत है। क्रांति के खिलाफ प्रतिक्रांति की विजय के कारण वह आदेश नष् हुआ।
कई लोगों को भगवद्गीता बहुत बड़ा धार्मिक ग्रंथ लगता है। बड़ेखेद के साथ मुझे कहना पड़ रहा है कि यह कहने जैसा कुछ मुझे उस किताब में मिला नहीं। उल्टे, उस ग्रंथ ने कई अनर्थ किए हैं। बुद्धि की कसौटी परखरी न उतरने वाली बातों को उसमें सैद्धांतिक आधार देने की कोशिश की गई है।
जो हो, आखिर राजनीति, समाज, राज्य शासन, धर्म और बुद्धिवाद के क्षेत्रों में बुद्ध ने जो शुरूआत की थी वह आगे चल कर नाकाम हुई। धर्म और राजनीति को एक करते हुए यह साबित करने के लिए मनुस्मृति लिखी गई कि चातुर्वर्ण्य केवल सामाजिक प्रथा नहीं, वह एक राजनीतिक दर्शन है।
हमारे सामाजिक और राजनीतिक जीवन की बुनियाद बुद्धिवाद ही होनी चाहिए। हर देश में राजनीतिक नेता को कसौटी पर कसा जाता है। लेकिन गांधी को देखिए। उनके लिए कोई कसौटी नहीं लगाई जाती। वह जो कही वही सच है। दो वर्ष पूर्व गांधी ने कहा, पाकिस्तान पाप है, तब सभी कांग्रेस वालों ने उनकी हां में हां मिलाई। आज गांधी कह रहे हैं- पाकिस्तान पाप नहीं। मुसलमान अगर कुछ मांगते हैं तो उन्हें वह दिया जाना चाहिए। और काँग्रेसवाले उनकी इस बात में भी ‘हां’ कहते हैं। हमारे सामाजिक, राजनी तिक और बौधिक जीवन में बुद्धिवाद को कैसे परे कर दिया जाता है इसका यह एक उदाहरण है। इन स्थितियों का अंत अगर नहीं होता है तो देश पर बड़ा संकट आएगा।