404 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ब्राह्मणेतर पक्ष के सुशिक्षित युवक अगर यहां आते और उनके आगे हमें किसी दार्शनिक की तरह विद्वत्ताप्रचुर भाषण देना होता तो वैसा करने में मुझे बड़ा उत्साह म हसूस होता। लेकिन यहां नए विचारों वाले युवाओं से अधिक पुराने नेता और कार्यकत्ता अधिक संख्या में उपस्थित हैं यह देख कर मेरा उत्साह ठंडा पड़ रहा है। इसके बावजूद मैं आपके आगे अपने विचार प्रस्तुत करता है।
मद्रास ब्राह्मणेतर पक्ष, जस्टीस पार्टी, इस क्षेत्र में 1917 से 1937 तक यानी 20 सालों तक अधिकार में थी। इसके बावजूद 1937 के चुनावों में इस पक्ष की हार क्यों हुई? यह सवाल पूछने लायक है। ब्राह्मणेतर पक्ष निर्माण हुआ यह लोकतंत्र के नजरिए से बड़ी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटना थी। यह बहुत महत्वपूर्ण घटना है। ‘ब्राह्मणेतर’ शब्द के कारण उसे जातीय स्वरूप प्राप्त हुआ। यह पक्ष लोकतंत्र के नजरिए से महत्वपूर्ण था। हिंदू समाज में ब्राह्मण और ब्राह्मणेतर इस प्रकार के दो वर्ग हजारों सालों से आस्तित्व में हैं। ब्राह्मण वर्ग विषमता मानता है। हजारों सालों से धार्मिक और राजनीतिक सत्ता अनियंत्रित रूप से उनके हाथों में है। ब्राह्मणेतर वर्ग समता को मानने वाला है। समाज में समता स्थापन करने के लिए हुकुम चलाने वाले ब्राह्मण वर्ग पर उसने आज तक हजारों बार जोरदार हमले किए हैं। लेकिन तानाशाह ब्राह्मण वर्ग धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र की सभी मौके की जगहों को काबीज कर बैठा है। और इसी का फायदा उठाते हुए वह हमेशा ब्राह्मणेतरों के सभी हमले नेस्तनाबूत करता आया है। इसीलिए ब्राह्मणवर्ग, ब्राह्मणेतर वर्ग के अनियंत्रित राज्यकर्ता के रूप में वैसे ही रहा है। ब्राह्मणेतर वर्ग समता को मानने वाला है लेकिन वह विषमता को मानने वाले ब्राह्मणवर्ग को नेस्तनाबूत कर समाज में समता और देश में प्रजातंत्र की स्थापना नहीं कर पाया।
ब्राह्मणेतर पक्ष आपके इलाके में बीस साल से सत्ता में था। इसके बावजूद वह ब्राह्मण वर्ग को नेस्तनाबूत नहीं कर पाया। इसके कई कारण हैं। उनमें से प्रमुख कारण है-इस पक्ष के लोगों की स्वार्थांधता, भेडि़या श्वसान का आकर्षण, पढे-लिखे ब्राह्मणेतरों में समाज से अलिप्त रहने का भाव, पक्ष के उद्देश्य और नीति की संकीर्णता और संगठन की शिथिलता आदि। 1917 से 1937 के दरमियान यह पक्ष सत्ता में रहा। लेकिन उसे जनता के हित का काम करने से अधिक ब्राह्मणवर्ग को गाली-गलौज करना ही अधिक महत्वपूर्ण लगा। उसी में इस पक्ष की पूरी ताकतखर्च हो गई। गांव की जनता गरीबी से परेशान है। साहूकार के चंगुल में फंसी है। उसके हित के लिए व्यवसायादि शुरू करना, साहूकार के चंगुल से उसे छुड़ाना आदि काम करने की सुध इस पार्टी के पास नहीं रही। अपने रिश्तेदारों को नौकरियां दिलाने का मुख्य कार्य ही इन्होंने सर्वाधिक किया। नौकरी पर लगे युवा ब्राह्मणेतर समाज से अलिप्त रह कर ऐशोआराम में जीवन बिताने लगे। ब्राह्मणों को गालियां देने वाले ब्राह्मणेतर फिर ब्राह्मणों की ही तरह गंध लगाने,