211 24.9.1944 शासक समुदाय बनना ही हमारा लक्ष्य और आकांक्षा - मद्रास - Page 427

406 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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शासक समुदाय बनना ही हमारा लक्ष्य और आकांक्षा

‘‘मद्रास इलाका शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन के तत्वावधान में मद्रास पार्क टाऊन के मेमोरियल हॉल में रविवार, 24 सितंबर, 1944 की शाम 4 बजे अस्पृश्यों की विशाल सार्वजनिक सभा संपन्न हुई। अध्यक्ष स्थान पर थे रावबहादुर एन. शिवराज। इस सभा में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर आए तब सब लोगखड़े हुए। तालियों से और जयघोष करते हुए उन्होंने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का स्वागत किया। अध्यक्ष ने उनका स्वागत किया। इस सभा में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को, (1) मद्रास और द्रविड वर्कर्स एसोसिएशन, (2) साऊथ इंडियन बुद्धिस्ट एसोसिएशन, (3) शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन ऑफ दी सिविल एंड मिलिटरी स्टेशन, बैंगलोर, (4) मद्रास शेडयूल्ड कास्टस् स्टुडंटस एसोसिएशन, (5) आंध्र प्राविन्शियल शेडयूल्ड कास्टस् वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य संस्थाओं की ओर से मानपत्र देने का समारोह हुआ। एक युवक ने बाबासाहेब को भगवान बुद्ध की सुंदर, रंगीन तस्वीर अर्पण की। मानपत्र के लिए धन्यवाद देते हुए बाबासाहेब ने इस सभा में भाषण दिया जिसमें विरोधी पक्ष को गुस्सा दिलाने वाली कुछ पुरानी जानकारियां दी। *

** डॉ. बाबासाहब ने अपने भाषण में कहा,

अध्यक्ष महाराज, भाइयों और बहनों,

मद्रास शहर में आपने इतने बड़े पैमाने पर मेरा सम्मान किया इसके लिए मैं पहले ही आपके प्रति आभार प्रकट करता हूं। इसी मद्रास शहर में एक बहुत बड़े व्यक्ति ने हाल ही में अपने भाषणों में दो बार मेरे बारे में बहुत बुरे शब्दों का प्रयोग किया है। वह व्यक्ति हैं- सांसद श्रीनिवास शास्त्री। भाषण की शुरूआत में ही मुझे उनको जवाब देना पड़ेगा। कुछ दिनों पूर्व तक जब पाकिस्तान के मसले ने शास्त्री को उलझन में नहीं डाला था तथा किसी भी अंतर्राष्ट्रीय परिषद में हिंदुस्तान के इकलोते प्रतिनिधि और भारत वर्ष की आत्मा के नाते महात्मा गांधी ही हिस्सा ले सकते हैं ऐसा उन्हें लगता था जब एक बार उन्होंने कहा था कि जो भी हो, हिंदी जनता को इस बारे में एहतियात बरतना होगा कि डॉ. अम्बेडकर किसी भी आंतर्राष्ट्रीय परिषद में हिस्सा नहीं ले पाएं। उनके जैसे वरिष् और पूजनीय व्यक्ति के मुंह में ऐसी भाषा सुन कर मुझे थोड़ा अचरज लगा। मेरा

* डॉ. भी. रा. अम्बेडकर चरित्रः चां. भ. खैरमोडे, खंड 9, पृष्ठ 356-57

** ‘जनता’ के उपलब्ध अंक में 4 और 5 पृष्ठ पर यह भाषण प्रकाशित हुआ है लेकिन उन पृष्ठों पर अंक की तारीख नहीं है और इस अंक का प्रथम पृष्ठ उपलब्ध नहीं है-संपादक