412 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
यह बताने की जरूरत नहीं कि साइमन कमीशन ने कितने आग्रह के साथ अस्पृश्यों के पृथक चुनाव-क्षेत्र रखे जाने की सिफारिश की थी। अस्पृश्य समाज इस देश का एक पृथक और महत्वपूर्ण हिस्सा नहीं है ऐसा कहने की क्या किसी की हिम्मत है? गोलमेज परिषद में सरकार ने उन्हें अलग प्रतिनिधित्व क्यों दिया? अस्पृश्य समाज हिंदुओं की कोई शाखा या जाति नहीं है। वह एक पृथक घटक है। इसीलिए उसके प्रतिनिधियों को अलग से शामिल करा लिया गया था। इसी प्रकार संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट देखें। यह सब पुराना इतिहास है। उसके बाद कई बातें घटी हैं। सो, अस्पृश्य समाज एक अलग घटक है।
मैं अपने हिंदु भाइयों को साफ तौर पर बताना चाहता हूं कि इन सारी पुरानी कल्पनाओं को वे त्याग दें। मन में एक बात पक्के तौर पर गांठ बांध लें कि अच्छे के लिए हो या बुरे के लिए हो, अब यह बात मानी जा चुकी है कि अस्पृश्य समाज हिंदुस्तान का एक अलग घटक है। मैं उन्हें बिल्कूल स्पष्ता के साथ कहना चाहूंगा कि वे इस बारे में किसी तरह के शक को अपने मन में घर ने बनाने दें।
गांधी-जिन्ना की लेन-देन संबंधी बातचीत के प्रमुख मसले के बारे में मुझे कुछ नहीं बताना है। लोग मुझसे पूछते हैं कि गांधी-जिन्ना की लेन-देन संबंधी बातचीत के बारे में मैं कुछ बोलता क्यों नहीं? इस लेन-देन के बारे में क्या कहा जाए यही मेरी समझ में नहीं आता।
अब जिस तरह चल रहा है उस तरह केवल दो पक्षों के बीच चल रही सुलह की कोशिश हमेशा संदहास्पद होती है। तीसरे को लूट कर अपना फायदा ऐंठने का यह दोनों का षडयंत्र है ऐसा मुझे लगता है। जिन्ना गांधी से क्या चाहते हैं और गांधी जिन्ना को क्या देने के लिए तैयार हैं में नहीं जानता। लेकिन डर जरूर लगता है कि जिन्ना को उनके हिस्से से अधिक अगर वह कुछ देंगे तो वह मेरे हिस्से में से निकाल कर देंगे। सो, इस लेन-देन से मुझे इतना डर क्यों लगता है यह आप इस बात से समझ सकते हैं। गांधी की नीति का सबसे बड़ा हिस्सा यही है कि देश के सबसे बड़े पक्ष का समर्थन प्राप्त करना और काँग्रेस को और मजबूत बनाना और इसके सहारे अंग्रेज सरकार को डरा कर अस्पृश्यों की मांगों को परे हटाते हुए सुलह करने पर मजबूर करना।
जातीय मसले जब से क्षितिज पर उभरने लगे तब से अपने सार्वजनिक जीवन में गांधी अगर कुछ किया है तो बस यही कि उन्होंने अस्पृश्यों को नजरंदाज किया है।
गोलमेज परिषद में गांधी ने मुझे अकेला करने की बहुत कोशिश की। हिटलर की भाषा में अगर बताना हो तो उन्होंने मुझे चारों ओर से घेर लिया। मुझे अकेला कर मेरा पूरा समर्थन नष् करने की कोशिश उन्होंने की। कई दिनों तक कोशिश करने के बाद