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* पार्टियों और जातियों के हार्दिक सहयोग से ही राजनीतिक पेंच
हल होंगे
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर गुरूवार, 28 सितंबर, 1944 की शाम राजमहेंद्री पहुंचे। उनके साथ श्री पां. न. राजभोज, जनरल सेक्रेटरी फेडरेशन और श्री वी. रामकृष्णन, एसीएम लेबर डिपार्टमेंट भी थे। म्युनिसिपालिटी की ओर से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को म्युजियम हॉल में आयोजित कार्यक्रम में मानपत्र दिया गया। म्युनिसिपल चेयरमैन श्री सेमिना कामेश्वरराव और म्युनिसिपल कमीश्नर श्री के. व्यंकटाद्रि चौधरी ने उनका स्वागत किया। बाबासाहेब का अद्वितीय विद्यार्जन, अस्पृश्यों में उनके द्वारा लाई गई जागृति, तथा उनके और श्रमिकों के लिए उनके द्वारा किए गए काम आदि के बारे में मानपत्र में जिक्र करते हुए म्युनिसिपालटी ने लोकोपयोगी तथा अस्पृश्यों के हित के कौन से काम किए इसकी जानकारी दी गई थी। सरकार से कुछ मांगे भी रखी गई थीं।
लोकोपयोगी काम करने के लिए बाबासाहेब ने म्युनिसिपालिटी का अभिनंदन किया। अस्पृश्यों की शिक्षा प्रबंध करने के लिए भी उन्होंने प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत की यह अपनी तरह की एक ही म्युनिसिपालिटी है जो अस्पृश्यों की शिक्षा के लिए कोशिश कर रही है। इसके लिए आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अन्य म्यु निसिपालिटियों को उसका आदर्श चलाना चाहिए।
गांधी-जिन्ना के बीच हो रही बातचीत असफल होने के प्रति उन्होंने दुख व्यक्त किया। कहा कि बाचतीत एक पक्षीय थी, सभी पहलु उसमें समाविष् नहीं थे, उसमें अल्पसंख्यक जातियों को कोई स्थान नहीं मिला था, राजनीतिक मसलों को हल करने का यह तरीका नहीं है ऐसा उन्होंने कहा। उन्होंने कहा कि, सब मिल कर बैठें, संविधान बनाएं, संविधान पर हस्ताक्षर करें और इस संविधान के अनुसार हमें भारत में चलाने दें’ इस मांग के साथ एक प्रतिनिधिमंडल लंदन, भेजें, भले उस प्रतिनिधिमंडल के एक मात्र सदस्य महात्मा गांधी क्यों न हो। वे अच्छे तरीके से भारत की मांग उनके मामले रखें। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि गांधीजी ने इस देश में अब तक प्रचंड राजनीतिक जागृति निर्माण की है। लेकिन गांधी जी के पास वह दूरंदाजी नहीं है जिससे कि इस जनजागृति का फायदा देश को आजादी दिलाने के लिए कैसे किया जाए? ओल्ड टेस्टामेंट में एक
* डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर चरित्रः ले. चां. भ. खैरमोड़े खंड 9, पृष्ठ 395-96