424 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है-ऐसा अस्पृश्य हिंदुओं के बारे में कहा जा सकता है। ऐसे पूंजीपति छैलों के हाथों में देश की आजादी अगर जाने वाली है तो उस आजादी का हमें और देश की जनता के लिए कोई मतलब नहीं। हिंदुओं के हाथ में अगर देश की सत्ता जाए तो वह अस्पृश्य समाज और दुखी-परेशान लोगों का ज्यादा ही दमन करने की कोशिश करेंगे, इसका मुझे पक्का यकीन है। इसलिए हमें अभी से सावधान रहना जरूरी है। इस समय हमने अगर अपना संगठन मजबूत नहीं किया तो अमेरिका के संविधान में निग्रो लोगों का जो हाल है ऐसा ही हाल हमारा भी होगा। इस बात पर हममें से हरेक को यकीन होना चाहिए। अमेरिका जैसे उन्नत राष्ट्र में बीसवीं सदी में भी निग्रो लोगों के अधिकारों का कोई स्थान नहीं। इसका एकमात्र कारण यही है कि उनके एकता नहीं, उनका संगठन नहीं। इसीलिए उनकी यह दुर्गत है। हमें ध्यान रखना होगा कि हमारा हाल नीग्रो लोगों जैसा न हो। इसका एक ही उपाय है कि हममें से हर कोई- छोटे-बड़े महिला, पुरुष सब शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन के एक ही झंडे के नीचे संगठित हों। आपस में मिल कर अगर हम अभेद्य संगठनखड़ा करेंगे तो अपने हकों की रक्षा कर हिंदुओं के सभी वार हम आसानी से निरस्त कर सकेंगे।
आज के युग में अखबारों का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। अपने पक्ष के प्रचार के लिए अन्य पक्ष हजारों रुपएखर्च कर अखबार चलाते हैं। अपने राजनीतिक और नैतिक विचार लोगों तक पहुंचाने के लिए तथा चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा किए गए कार्य की जानकारी देने के लिए अखबारों की आवश्यकता है। अपने आंदोलन का नजरिया लोगों तक पहुंचाने के लिए आज हमें हर प्रांत में कई अखबार चलाने की जरूरत है। इस प्रकार अस्पृश्य समाज को ओर से यहां से शुरू हो रही ‘पीपल्स हेराल्ड’ साप्ताहिक पत्रिका हमारे विचारों को निर्भीकता से लोगों के सामने रखने का काम करेगी इसका मुझे पूरा भरोसा हैं। मेरी मनोकामना है कि ‘पीपल्स हेराल्ड’ की उत्तरोत्तर उन्नति हो।