218 6.5.1945 अपनी हिम्मत ओर कर्तृता के सहारे देश के लिए जो करना है वह हम अपने बल पर करेंगे - परेल (मुंबई) - Page 447

426 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मुंबई में 26000 सदस्य

इस अधिवेशन की तैयारी करने के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं को पर्याप्त समय नहीं मिला। पहले उन्होंने तय किया था कि अप्रैल के आखिरी हफते में मुंबई शहर के दलित फेडरेशन की परिषद आयोजित करेंगे। फेडरेशन की मुंबई शाखा के सचिव श्री एस.बी. माधव इस सिलसिले में डॉ. अम्बेडकर से इजाजत लेने के लिए जब दि८ी गए तब उन्हें इस निर्णय से अवगत कराया गया कि जल्द से जल्द अखिल भारतीय अधिवेशन आयोजित करना होगा। इतने कम समय में सभी तैयारियां पूरी करने काम स्थानीय कार्यकर्ताओं ने बेहतरीन ढंग से पूरा किया। सबसे पहले उन्होंने मुंबई को दलित फेडरेशन संगठन का आदर्श बनाने के लिए सदस्यों के पंजीकरण की जोरदार मुहिम छेड़ दी। मुंबई में फेडरेशन की 20 वॉर्ड कमेटियों ने प्रचार करते हुए सदस्य संख्या को 6 हजार से 26 हजार तक पहुंचा दिया। ‘नेरे पार्क’ पर शानदार सभामंडपखड़ा करने का काम तेजी से पूरा किया गया। बाहर से आनेवाले प्रतिनिधियों और दर्शकों के ठहरने का इंतजाम, परेल के महापालिका के विद्यालयों में किया गया। अधिवेशन के दौरान नेरे पार्क पर इकट्ठा हुआ जन-सेलाब मुंबई दलित फेडरेशन के सैंकड़ों युवा कार्यकर्ताओं द्वारा दिन-रात जी-जान लगा कर, मेहनत से म्निर्माण किए गए उछाह का सबूत था।

जुलूस में हुए दस हजार लोग शामिल

शुक्रवार, चार तारीख को शाम को अखिल भारतीय फेडरेशन के अध्यक्ष रावबहादुर शिवराज का दादर सेटेशन पर स्वागत किया गया। श्रीमती मीनांबल शिवराज को परेल महिला संघ की ओर से पुष्प हार पहनाया गया। स्टेशन से नरे पार्क तक अध्यक्ष को जुलूस के साथ ले जाया गया। इस जुलूस में 10,000 लोगों ने हिस्सा लिया था।

‘आठ करोड़ दलित जनता की सामर्थ्य अपार है’, ‘डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर चिरायू हों’ ‘दलित फेडरेशन के झंडे के नीचे सब एक हों’, ‘हरिजन शब्द का धिक्कार है’, ‘समता सैनिक दल में शामिल हो’, जैसे नारे लिखी हाल पताकाएं जुलूस में जगह-जगह दिखाई दे रही थीं। डॉ. अम्बेडकर को जयकार से वातावरण गूंज रहा था।

पौन मील लंबा जुलूस नरे पार्क के ‘साध्वी रमाबाई अम्बेडकर नगर’ में पहुंचने के बाद बीस हजार की संख्या में जुटे जनसमुदाय के सामने रा. ब. शिवराज के हाथों झंडा फहराया गया। जहाज के लंगर के चित्र वाला दलित फेडरेशन वाला लाल झंडा ऊंचाई पर फड़कने लगा और समता सैनिक दल के तीन हजार स्वयंसेवकों ने उसे सलामी दी। दर्शकों द्वारा तालियों की गड़गड़ाहट हुई।