218 6.5.1945 अपनी हिम्मत ओर कर्तृता के सहारे देश के लिए जो करना है वह हम अपने बल पर करेंगे - परेल (मुंबई) - Page 449

428 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मुंबई के श्री वेलणकर, बैटिस्टर माने, बड़ौदा के मणिकांत परमार आदि लोगों के संदेश थे। उनके बाद स्वागताध्यक्ष श्री जी. एम. जाधव बनाम मडकेबुला का भाषण हुआ। पंडात में इकट्ठा अपार जनसमूह देख कर उनका मन भर आया। भूमिका बांधने के बाद अपना भाषण पढ़ कर सुनाने की उन्होंने विधायक पी.जे. रोहम से विनति की। उनके भाषण के बाद अधिवेशन के अध्यक्ष को उन्होंने पुष्पहार और गुलदस्ता अर्पण किया। इसके बाद रा.ब.एन. शिवराज बोलने के लिए उठे। दशकों की ओर से लगातार तालियों की आवाज आ रही थी। ऑल इंडिया शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन के तीसरी बार अध्यक्ष चुने जाने को लेकर उन्होंने धन्यता व्यक्त की। उन्होंने अपना अध्यक्षीय भाषण अंग्रेजी में दिया। इसलिये उनके भाषण को विद्यायक भा.कृ. गायकवाड़ ने लोगों को समझने में आसानी हो मराठी में सुनाया। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर शुरू से इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। ख्2,

डॉ. अम्बेडकर के भाषण के बार परिषद में निम्नांकित चार महत्वपूर्ण प्रस्तावों को लेकर अलग-अलग वक्ताओं के भाषण हुए।

-पहले प्रस्ताव में सप्रू योजना का विरोध किया गया है। साथ ही संविधान समिति की कल्पना दलित फेडरेशन को पसंद न होने की बात जाहिर की है।

-दूसरे प्रस्ताव में व²कग कमेटी द्वारा सितंबर, 1944 में मद्रास की बैठक में रखी गई राजनीतिक मांगों का समर्थन किया गया है।

‘‘परिषद में रखे गए प्रस्ताव मनोहर धाली द्वारा प्रस्ताव तीसरे प्रस्ताव में हिंदुस्तान सरकार की औद्योगिक नीति के प्रति तीव्र नापसंदगी व्यक्त की गई है। व्यवसाय-उद्योग और जमीन पर सरकार की मालिकियत होनी चाहिए- यह मांग की गई है। इसी प्रस्ताव में बंगाल में अकाल के कारण आई बदहाली को लेकर दुख व्यक्त किया गया तथा सरकार को चेतानवी दी गई है कि इस प्रकार के हाहाकार की पुनरावृत्ति न होने के हिसाब से उपायों की योजना की जाए।

-चौथे प्रस्ताव में मांग की गई है कि युद्ध के बाद बेकार होने वाले अस्पृश्य सैनिकों को काम दिलाने के इंतजाम किए जाएं।

महिला परिषद

इसी अवसर पर श्रीमती मीनांबल शिवराज की अध्यक्षता में अस्पृश्य महिला परिषद का आयोजन किया गया था। परिषद के सामने प्रमुख प्रस्ताव शिक्षा के बारे में था। कु. शांताबाई दाणी, डॉ. कु. लेंढे, श्रीमती विमलाबाई भोसले, श्रीमती गीताबाई गायकवाड़, श्रीमती सर्वगोढ़, श्रीमती शांताबाई वडलकर आदि वक्ताओं ने अपने जोरदार भाषणों में अस्पृश्य महिलाओं को संदेश दिया कि वे फेडरेशन का संगठन मजबूत करें।

  1. जनताः 12 मई, 1945