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म्यूनिसिपालिटी के कर्मचारियों की मांगे
शनिवार की रात हुई मुंबई म्यूनिसिपल कामगार संघ की परिषद में मांग की गई कि म्यूनिसिपल कर्मचारियों के हालात के बारे में पूछताछ करने के लिए हिंदुस्तान सरकार एक कमेटी नियुक्त करे। साथ ही महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की मांग भी की गई। यह परिषद विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि अस्पृश्य समाज का बड़ा तबका म्यूनिसिपल कर्मचारी के रूप में कार्यरत था।
विद्यार्थी परिषद
रविवार की सुबह श्री प्यारेलाल तलीब की अध्यक्षता में हुई विद्यार्थी परिषद में अस्पृश्य छात्रों के लिए अलग स्कूल-कॉलेजखोले जाने की मांग रखी गई।
समता सैनिक दल
दोपहर श्री जे. एच. सुब्बय्या की अध्यक्षता में समता सैनिक दल की परिषद हुई। इस परिषद में अस्पृश्य युवाओं को संदेश दिया गया कि वे इस संगठन में हजारों की संख्या में शामिल हों। उन्हीं की अध्यक्षता में संस्थानों के दलित फेडरेशन का अखिल भारतीय अधिवेशन हुआ।
प्रतिनिधियों से मुलाकात
परिषद में शामिल होने के लिए आए प्रतिनिधियों से उनके रहने की जगह जाकर लिए साक्षात्कारों में काफी जानकारी मिली। अहमदाबाद से आए प्रतिनिधियों ने बताया कि श्री गुलजारीलाल नंदा के ‘मजूद महाजन’ के लोग स्पिनिंग विभाग के अस्पृश्य मिल मजदूरों को धमकियां देकर मंजूर महाजन के सदस्य बना लेते हैं। कोई अगर उनकी बात नहीं मानता तो मालिकों से उसे काम से हटवा देते हैं। राजनीतिक मामलों से अमदाबाद के अस्पृश्य कामगारों का समर्थन दलित फेडरेशन को ही होने की बात उन्होंने बताई। यवतमाल के एक प्रतिनिधि ने संयुक्त चुनाव क्षेत्र होने के कारण अस्पृश्यों पर होने वाले अन्यायों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जिले की एक म्यूनिसिपालिटी में अस्पृश्यों के लिए आरक्षित सीट पर हिंदू और मुसलमानों ने मिल कर एक अस्पृश्येतर व्यक्ति की रखैल को चुनाव में जिता दिया! अस्पृश्य समाज को चिढ़ाने वाला यह केवल इकलौता उदाहरण, अपवादस्वरूप है ऐसी बात नहीं। अपने अनुभव के आधार पर उहोंने यह बात बताई।
गांवों में होनेवाले जुल्म
गांव में अस्पृश्यों पर ढाए जाने वाले जुल्मों के बारे में जानकारी वन्हाड से आए एक प्रतिनिधि ने दी। वहां सनदी नौकर के रूप में काम करने वाले अस्पृश्य कामगार को गांव कोतवाल कहा जाता है। पुराने जमाने में उसे जमीन या लेहना तय कर दिया जाता था। साथ ही, अस्पृश्य समाज द्वारा रूढि़ चलाई गई थी कि उसे भीख भी मांगनी