218 6.5.1945 अपनी हिम्मत ओर कर्तृता के सहारे देश के लिए जो करना है वह हम अपने बल पर करेंगे - परेल (मुंबई) - Page 451

430 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

होगी। इस रूढि़ का पालन करने से अस्पृश्यों ने इनकार किया इसलिए उनका लेहना भी बंद करवा दिया गया है और उन्हें हर माह 8 रूपयों की तनख्वाह और 4 रुपयों का महंगाई भत्ता दिया जाता है। उसी प्रकार उन्हें काम से हटाने का अधिकार गांव के पुलिस पाटील को होता है। सो उनकी तनख्वाह का अधिकतर हिस्सा पुलिस-पाटील ऐंठ लेता है। इतना ही नहीं वह उनसे अपने घर में तथाखेतों में मुफत काम करने पर मजबूर करता है।

मिल मजदूरों की शिकायातें

नागपुर की मिल में काम करनेवाले कुछ प्रतिनिधियों ने रुईकर के बारे में अपना तीव्र असंतोष प्रकट किया और बताया कि बहुत कम तनख्वाह और महंगाई भत्ता मिलता है। नागपुर में 70 प्रतिशत मजदूर अस्पृश्य समाज से हैं और उनमें से ज्यादातर मजदूर, युनियन के सदस्य हैं।

दलित समाज की एकता

अस्पृश्य समाज के बहुसंख्य लोग अपनी जमीन ने होनेवाले किसान हैं, मजदूर किसान हैं और मिल-कारखानों में मजदूरी करने वाले हैं। उनकी विशिष् मांगों का प्रतिबिंब दलित फेडरेशन के प्रस्ताव और कार्य में दिनोंदिन अधिकाधिक अनुपात से दिखाई देगा, इसमें कोई दो राय नहीं। हालांकि राजनीतिक मांगों के संदर्भ में समूचा अस्पृश्य समाज आज दलित फेडरेशन के पीछेखड़ा है, यह जाहिर है। इस संगठन को अधिक मजबूत बनाने में तथा अन्य राजनीतिक संस्थाओं के साथ उसे जोड़ने में न केवल अस्पृश्य समाज का बल्कि पूरे देश की जनता का हित है इस बारे में फेडरेशन के इस अधिवेशन से सबको यकीन होगा। ख्3,

डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर का भाषण

रविवार, दिनांक 6 मई, 1945 को अखिल भारतीय शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन के तीसरे अधिवेशन के लिए बनाए गए विशाल साध्वी रमा बाई अम्बेडकर नगर में अखिल भारतीय महिला परिषद के अधिवेशन के बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का एतिहासिक दृषि् से महत्वपूर्ण भाषण हुआ। उनका भाषण सुनने के लिए करीब डेढ लाख का जन-समुदाय वहां इकट्ठा था। स्वागत मंडल द्वारा डॉ. बाबासाहेब से विनति की गई कि वे लोगों के सामने आकर उन्हें दर्शन दें। जो डॉ. बाबासाहेब ने मानी। श्री मडके बुवा ने डॉ. बाबासाहेब को गले में फूलमाला डाली। 7 बज कर 5 मिनट हुए, जब डॉ. बाबासा­ हेब वक्ता के लिएखासतौर से बनाए गए मंच पर आए। अम्बेडकर जिंदाबाद के नारों

  1. लोकयुद्धः 14 मई, 1945