431
से और तालियों की गड़गड़ाहट से समूचा वातावरण गूंज उठा। उपस्थित जन-समुदाय में पूरे हिंदुस्तान के अस्पृश्य लोग उपस्थित थे। लोगों की अपने इकलौते नेता पर कितनी अन्नय भक्ति है यह उनके कट्टर विरोधियों को भी मानना पड़ा। वह असीम अस्पृश्य जन-समुदाय स्वाभिमान, स्फूर्ति और चैतन्य के उफान पर था।
डॉ. बाबासाहेब का भाषण सब लोग तस्वीर की तरह निस्तब्ध होकर सुनने लगे। सुई के गिरने की आवाज भी सुनाई दे ऐसी शांति वहां छाई थी।
डॉ. बाबासाहब ने अपने भाषण में कहा,
इस अपार जनसमुदाय को देख कर सार्वजनिक काम करने वाले किसी को भी अचरज महसूस होगा? सार्वजनिक कामों में कार्यकर्ताओं के पास विशेष विद्या अथवा बुद्धि की जरूरत नहीं होती। काम करने की सच्ची लगन हो, त्याग करने के मानसिकता हो तो कोई भी अच्छा काम कर सकता है। ऐसे लोग हमारे बीच हैं और मुझे उम्मीद है कि कुछ और भी पैदा होंगे। हमारा काम बेहद कठिन है। काँग्रेस, मुस्लिम लीग या हिंदू महासभा की तरह हमारे पास धन नहीं। सो, तनख्वाह देकर जागृति लाने के इस काम के लिए लोगों को नियुक्त करना संभव नहीं। हमारे कुछ लोग अति अज्ञानी और भोले होने कारण काँग्रेस अथवा हिंदू महासभा के लोगों द्वारा लालच दिए जाने पर ऐसे लोग उनके वश में चले जाते हैं। इतना ही नहीं वे काँग्रेस या हिंदू महासभा के प्रचारक बन कर हमारे आंदोलन में फूट डालने की कोशिश करते हैं। हमारे आंदोलन के प्रचार के लिए हमारे हाथ में हमारा कोई अखबार नहीं है। काँग्रेस के अखबार हमारीखबरें छापते ही नहीं कभी छापा तो कुछ विकृत छापते हैं। यहां उपस्थित जनसमुदाय को देखें तो कोई भी यही कहेगा कि यहां सवा से डेढ लाख की संख्या में लोग मौजूद हैं। लेकिन कल की ऐसी ही एक सभा के बारे में एक मराठी अखबार ने केवल छह सौ लोगों के उपस्थित होने की बात लिखी है!!!
लॉर्ड वेवेल साहब विदेश गए हुए हैं। क्यों गए हैं कोई नहीं जानता। हालांकि जो
खबरे सुनने में आई हैं उनके आधार से यही लगता है कि हिंदुस्तान के नए संविधान को लेकर चर्चा के लिए लॉर्ड वेवेल साहब गए हैं। भुलभाई देसाई और काँग्रेस केखतों ने ही ये बातें फैलाई हैं। सो कहां जा सकता है कि उनमें सत्यांश होगा ही। इसी बारे में कुछ बातें मैं आज बताना चाहता हूं। मेरा भाषण अंग्रेजी में लिखा हुआ है। मातृभाषा के बजाय अंग्रेजी में भाषण लिख लाने का मलाल है लेकिन अंग्रेजी राजनीति की भाषा होने के कारण सरकार तथा अन्य सभी तरह के लोगों की समझ में आए इसलिए भाषण अंग्रेजी में ही लिखना पड़ा। आप सबकी जानकारी के लिए इस अंग्रेजी भाषण का मराठी तर्जुमा अपने ‘जनता’ अखबार में प्रकाशित होगा।