218 6.5.1945 अपनी हिम्मत ओर कर्तृता के सहारे देश के लिए जो करना है वह हम अपने बल पर करेंगे - परेल (मुंबई) - Page 453

432 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आज कई लोगों की नजरें अस्पृश्य वर्ग पर टिकी हैं। किसी समय अस्पृश्यों को कोई नहीं पूछता था। 1928 में साइमन कमीशन नियुक्त हुआ। उस समय लॉर्ड बर्कन हेड ने लोगों से कहा था कि आप राजनीतिक संविधान का निर्माण कर बताइए। इसी लॉर्ड बर्कन हेड के कहने से 1928 में काँग्रेस ने ‘नेहरू कमेटी’ नियुक्त की। इस नेहरू कमेटी ने संविधान के बारे में जो रपट लिखी है वह पढ़ने लायक है। अस्पृश्यों को तो उसे जरूर पढ़ना चाहिए। 150 प्रश्नों की इस रपट में केवल तीन वाक्यों में अस्पृश्यों का फैसला कर दिया गया है। इन तीन वाक्यों में नेहरू रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पृश्यों का मसला राजनीतिक नहीं, धार्मिक है। केवल सिक्ख और ईसाइयों के बारे में कुछ सवालों को हल करना होगा। क्या साबित होता है। 1928 में काँग्रेस सात करोड़ लोगों को शून्य करार दे रही थी। दो सालों बाद गोलमेज परिषद हुई। वहां अस्पृश्यों ने और कुछ किया हो न हो, शून्य के दस किए। एक पर शून्य लगाया। (तालियां) लेकिन गांधी ने दस के फिर एक बनाने की योजना बनाई। हालांकि वे कुछ कर नहीं पाए (हंसी)।

पिछले वर्ष सबके दिलों को जोड़ने के लिए ‘सप्रू समिति’ बनी। इस समिति ने नया संविधान कैसा हो, इस बारे में एक कच्चा ढांचा बना लिया है। सप्रू समिति के अनुसार 10 के इस आंकडे को 50 के पार पहुंचाना होगा। 50 के पार यानी अस्पृश्यों की उन्नति 0 से 50 से ऊपर तक हुई है। (तालियों की गड़गड़ाहट)

काँग्रेस, रॉय ग्रुप और कम्युनिस्ट हमसे निकटता बताते हैं ताकि वे हमारे आंदोलन के निष्प्रभ कर दें। कम्युनिस्टों का संदेश के साथखत उनके इसी उद्देश्य के साथ आया था। कल उसखत को मैं अधूरा पढ़ कर छोड़ दिया। 1920 से काँग्रेस के साथ हमारा जो झगड़ा चल रहा है वह कभी मिटेगा या नहीं, कह नहीं सकते। पिछले कई सालों में हमारा काँग्रेस के साथ जब संघर्ष चल रहा था। तब कम्यूनिस्ट और रॉयिस्ट दूर से चुपचाप देखते रहते थे। हमारी बुराई करते रहते थे। हमें राजनीतिक रूप से संरक्षक बंधन चाहिए और पिछले 20 सालों में इन्होंने इस बारे में कुछ नहीं किया। उन्हें अभी हमारे बारे में अपनापन क्यों महसूस हो रहा है?

रॉय वादी पूछते हैं कि अस्पृश्य हमारे साथ आकर क्यों नहीं मिलते? काँग्रेस की महिलाएं महारों की बस्ती में जाकर हमारी महिलाओं के सिर से जुएं बीनती हैं, उनकी साडि़यां धोती हैं, हमारे बच्चों को नहलाती हैं। हाल ही में काँग्रेस की महिलाओं ने पुणे की मांग बस्ती में जाकर हमारे बच्चों को दूध पिलाया। हालांकि दूसरे दिनखबर फैली कि हमारे बच्चों को दस्त होने लगे हैं। (हंसी) इस तरह का अपनापन और स्नेहभाव ये लोग क्यों दिखाते हैं, यह आप लोगों को समझना होगा।

हमारे युवा छात्र भाई और रॉयिस्टों की बातों में आते हैं। लेकिन जिन लोगों ने हमेशा