434 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
करने लगे। लेकिन आज वेखुद उनका विरोध कर रहे हैं। ऐसे हालात हैं इसलिए हमें जोरदार लड़ाई करनी होगी। हम जीत गए हैं ऐसा कोई न सोचे। आखिर आंदोलन की मजबूती के लिए सभी कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे अपने वरिषें के आदेशों को बिना शिकायत के स्वीकारने होंगे। ख्4,
किसी भी संगठन पर निर्भर रहे बगैर हमें अपना जोरदार संगठन बनाना होगा।
श्री मडकेबुवा का गौरवपूर्ण जिक्र कर उन्होंने कह चाहे कोई कितना भी अनपढ़ क्यों न हो, हम में से हर किसी को अपने समाज की सेवा करने का अधिकार है। इस तरह कार्य करने वाले नेता हममें से ही विकसित होंगे इसका मुझे यकीन है।
आप सबने जिन्होंने कि इतना अत्साह और कार्यक्षमता दिखाई उनके प्रति मैं अपना धन्यवाद अर्पण करता हूं और अपना भाषण पूरा करता हूं। (तालियों की गड़गड़ाहट)।
- जनताः 12 मई, 1945