219 6.5.1945 हमें जातीय बहुमत नहीं, राजनीतिक बहुमत चाहिए - मुंबई - Page 457

436 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उन्हें धन्यवाद दूं। आप सबको पता है कि उनमें तारीफ करने योग्य संगठन चातुरी है। इस अधिवेशन की अपूर्व सफलता का श्रेय उन्हें और उनके सहयोगियों को जाता है।

आज के कार्यक्रम में शायद आपको मुझसे उम्मीद है कि मैं हमारी सामाजिक तथा राजनीतिक समस्याओं के बारे में बोलूं लेकिन ऐसे मसलों पर ऊहापोह करने की आज मेरी इच्छा नहीं है। आज मैं एक महत्वपूर्ण विषय के बारे में- हिंदुस्तान के भावी संविधान की रूपरेखा के बारे में बोलना चाहता हूं। इसके कई कारण हो सकते हैं। अस्पृश्य समाज के रोजमर्रा की समस्याएं हल करने और आंदोलन का मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी आजकल मैं दि८ी में रहता हूं, इसलिए फिलहाल मेरे सिर पर नहीं है और मैं उसे अपने सिर लेना भी नहीं चाहता। इसीलिए, केवल अस्पृश्य समाज से संबंधित सवालों पर मैं नहीं बोलना चाहता।

अस्पृश्य लोगों पर कई बार स्वार्थी होने का आरोप लगाया जाता है। यह आरोप भी लगाया जाता है कि देश की राजनीतिक समस्याओं के बारे में उनके पास विधायक उपाय नहीं हैं। यह झूठा आरोप है। अगर इस आरोप को सच मान लें तो कहना पड़ेगा कि यह केवल अस्पृश्यों पर ही लागू नहीं होता। हिंदूस्तान के ज्यादातर लोग विधायक उपायों के बारे में सूचनाएं नहीं देते। ऐसा नहीं कि विधायक उपाय सुझाने की कुव्वत लोगों के पास नहीं होती। लगातार प्रचार कर लोगों के मन में यह बात डाल दी गई है कि काँग्रेस के गुट के अलावा अन्य किसी से आई सूचनाओं को स्वीकारा न जाए। बल्कि ऐसी सूचनाओं पर ध्यान भी न दिया जाए। यही बात देश की विधायक सोच के लिए मारक सिद्ध हुई है। इसके बावजूद देश की सामान्य राजनीतिक उन्नति के कुछ उपाय अस्पृश्य समाज पर लगा आरोप दूर करने के लिए सुझाता हूं। देश के लिए जरूरी लगे तो अपनाएं।

आज के दिन लोगों के सामान्य हितों के बारे में बोलना मैंने तय किया उसकी दूसरी वजह यह है।

संविधान की जिम्मेदारी

मैंने जो योजना बनाई है उसे स्पष् रूप से आपके सामने रखने से पूर्व दो विवादास्पद सवालों के बारे मैं बताना चाहता हूं। पहला सवाल, हिंदुस्तान का संविधान किसे लिखना चाहिए? यह सवाल निर्माण किया गया क्योंकि इस देश में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिन्हें -उन्होंने ऐसी कोई मांग पेश नहीं की है, फिर भी लगता है कि अंग्रेज सरकार को ही यहां की मुश्किल हल कर संविधान बनाना चाहिए। इस तरह की सोच मिटे पागलपन की है और मैं चाहता हूं कि उसे लोगों के सामने लाया जाना चाहिए। यह सोच मूर्खतापूर्ण है और मेरी राय में उसे इस बात को उजागर किया जाना चाहिए। अंग्रेज सरकार कानून बनाए और उन्हें हम पर लादा जाए, वे दिन अब लद गए।