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हिंदी लोगों द्वारा भावी संविधान के बारे में जिस प्रकार ह८ा मचाया जा रहा है उसे ध्यान में लिया जाए तो लगता है कि अंग्रेजों से लादा जाने वाला संविधान बेकार साबित होगा।
आज तक तैयार किए गए और भावी संविधान में मौलिक फर्क होगा। और लगता है यह फर्क उन लोगों के ध्यान में नहीं आया है जिन्हें आज भी यह लगता है कि हिंदुस्तान का संविधान अंग्रेज बना कर दें।
पुराने और भावी संविधानों में फर्क रहेगा-पुराने संविधान में संविधान को भंग किए जाने पर लागू की जाने वाली धारा की व्यवस्था की गई थी। हालांकि भारी संविधान में इस प्रकार की अधिक और साधारण धाराएं नहीं होंगी। इस अस्थायी धारा के खिलाफ 1935 के कानून की 93वीं धारा के खिलाफ हिंदुस्तान के लोंगों ने काफी ह८ा मचा रखा है। इसकी वजह यही है कि वे नहीं जानते हैं कि कानून में यह धारा कैसे और क्यों जुड़ी। हिंदुस्तान का जीवन जिन दो बातों पर निर्भर है उन्हें अगर वे समझेंगे तो 93 की धारा का निर्माण भी सहजता से उनकी समझ में आ जाएगा।
उनमें से पहली बात यह है कि कानून और व्यवस्था राजनीतिक जीवन की औषधियां हैं। राजनीतिक, जीवन में जब कोई गड़बडि़यां पैदा होती हैं तब इन औषधियों का प्रयोग करना होता है। ऐसे समय अगर इन औषधियों का इस्तेमाल ना किया जाए तो वह एक गुनाह होगा। दूसरी बात यह कि किसी भी सरकार को निरंतरता के लिए राज चलाने का पट्टा नहीं मिलता। यह बात सही होने के बावजूद अच्छी सरकार बनने तक राजकाज चलाने के लिए यानी कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार का होना जरूरी है। इन दो बातों के लिए ही ‘संविधान भंग’ धारा की आवश्यकता होती है। लोगों में शांति और सुरक्षा बरकरार रखने के लिए यह धारा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यही एक ऐसी धारा है कि जिसके सहारे देश को अराजकता से बचाया जा सकता है। क्योंकि जब सनदी सरकार टूट जाती है तब राजकाज चलाने के लिए इसी धारा की सहायता ली जा सकती है।
संविधान के अनुसार बनाई गई सरकार और उसके भंग होने पर उसकी जगह आनेवाली अस्थायी सरकार को नियुक्त करने की जो सुविधा ‘संविधान भंग’ धारा के अंतर्गत की गई थी वह आवश्यक थी। ‘आवश्यक थी’ कहने का कारण यही है कि संविधान के अनुसार सरकार बनाने के अधिकार भले हिंदी लोगों के दिए गए थे लेकिन संविधान के अनुसार बनी सरकार के भंग होने की स्थिति में राजकाज चलाने का अधिकार अंग्रेज सरकार ने अपने ही पास रखा था।
भावी संविधान में यह फर्क, यह प्रावधान नहीं रखा जा सकता। भारी संविधान के अनुसार अंग्रेज हिंदी लोगों को संविधान के अनुसार सरकार बनाने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। इतना ही नहीं सरकार के टूटने के बाद राजकाज चहाने का अधिकार