438 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भी उनके पास नहीं रहेगा। कारण साफ है कि आज तक हिंदुस्तान का संविधान इसी हिसाब से बनाया जाता रहा रहा कि हिंदुस्तान को उपनिवेशों के स्वराज का दर्जा प्राप्त नहीं है। भावी संविधान में इस प्रकार मान कर नहीं चला जा सकता। जिस देश के पास उपनिवेशों का स्वराज न हो उस देश के संविधान में ‘संविधान भंग’ की धारा न होना क्षम्य हो सकता है लेकिन औपनिवेशिक स्वराज देने वाला संविधान और ‘संविधान भंग’ की धारा वाला संविधान परस्पर विरोधी है। औपनिवेशिक आजादी जिस देश में हो वहां या तो संवैधानिक सरकार हो सकती है या फिर विद्रोह हो सकता है।
इसके क्या मायने हुए? इसके मायने ये हैं कि हिंदी संविधान के कलंकित होने की संभावना दिखाई दे रही हो तो संविधान बनाना असंभव हो जाता है। यही बात अलग शब्दों में देखते हैं। हिंदुस्तान के सभी घटकों का सम्मान करने वाला तथा उनकी आज्ञा मानने वाला ...संविधान तैयार करना जरूरी है। सबको, भले सब नहीं लेकिन नहीं, नहीं, जो भी हो हिंदुस्तान के सभी महत्वपूर्ण घटकों को उसे मानने के लिए सिद्ध होना चाहिए। उसका हर तरह से समर्थन किया जाना चाहिए। यह तभी हो सकता है जब हिंदी लोगों द्वारा हिंदी लोगों के लिए और हिंदी लोगों की इच्छा के अनुरूप, उनकी अनुमति से संविधान बनाया जाए। अंग्रेज सरकार अगर संविधान लागू करती है और किसी इकाई द्वारा उसे मान्यता न मिले, किसी दूसरी सामाजिक इकाई द्वारा उसका विरोध किया जाए तो इस देश में संविधान के प्रति बैर-भाव रखने वाला एक वर्ग तैयार होगा। यह वर्ग, उस संविधान के कामकाज में न केवल अड़चनेंखड़ी करेगा, बल्कि अपनी समूची ताकत को उसे नेस्तनाबूत करने में लगाएगा। संविधान विरोधी दल अपना कर्तव्य मानते हुए संविधान नष् करने को पूरी-पूरी कोशिश करेगा और जैसा लेटिन अमेरिका में हुआ था ठीक उसी तरह संविधान को लागू करने वालों के खिलाफखुले आम प्रचार करेगा।
अंग्रेजों द्वारा हिंदुस्तान के लिए संविधान बनाना बिल्कुल बेकार हैं क्योंकि उसे लागू करने के लिए वे यहां नहीं रहेंगे। किसी ताकतवर सामाजिक इकाई द्वारा या ऐसी इकाइयों के समूह के द्वारा अगर यह संविधान लागू किए जाने की कोशिश होगी तो वही परिणाम सामने आएंगे। इसीलिए मेरी पक्की राय यही बनी है कि अगर हिंदी लोग स्वायत्तता चाहते हैं तो वे संविधान तैयार करने की जिम्मेदारी से प८ा नहीं झाड़ सकते। इस प्रकार यह टाली न जा सकने वाली जिम्मेदारी है।
संविधान
दूसरा प्रश्न उपस्थित होता है कि संविधान निर्माण के लिए क्या संविधान समिति की आवश्यकता है? आज हर कोई संविधान समिति के बारे में बोल रहा है। इस्तीफा देने से पूर्व काँग्रेस मंत्रीमंडल ने मांग की कि, जिसमें सभी हिंदी लोग ही हों ऐसी समिति द्वारा संविधान