440 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बारे में सप्रू कमेटी द्वारा दी गई सूचनाओं के बारे में सोचते हैं। इस कमटी द्वारा हमेशा के लिए समिति के सदस्यों की संख्या 160 तय कर दी गई है। इसके अनुसार आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के आधार पर प्रांतीय विधिमंडल के सदस्यों द्वारा संयुक्त मतदान पद्धति से चुनाव कराते हुए उपस्थित तीन चौथाई सदस्यों द्वारा तथा मतों द्वारा निर्णय लेने की पद्धति को अपनाना होता है। असल में, अन्य दो सवालों के जवाबों पर यह बात निर्भर करती है कि क्या कोई भी अल्पसंख्यक समाज इस प्रकार की संविधान समिति को निष्पक्ष और विश्वासयोग्य मानते हुए उसका स्वीकार करेगा? पहला पश्न है- क्या समिति इस बात की जिम्मेदारी ले सकती है कि समिति के लिए चुने गए अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि वास्तव में उनका प्रतिनिधित्व करते हैं? दूसरा प्रश्न है- क्या वह इस बात का जिम्मा ले सकती है कि संविधान समिति द्वारा निकाले गए परिणामों के कारण विशेष अल्पसंख्यकों के हकों पर गाज नहीं गिरेगी?
कम से कम मैं दावे के साथ यह नहीं कह सकता कि इन दोनों मामलों में अल्पसंख्यकों को डरना नहीं चाहिए। इन सवालों के बारे में सोचने से पूर्व क्रिप्स साहब की संविधान समिति और सप्रू की संविधान समिति में क्या फर्क हैं यह देखते हैं। फर्क इस प्रकार हैं-
(1) सप्रू समिति ने तय कर डाला है कि संविधान समिति में कुल 160 सदस्य होने चाहिए। सर स्टँफर्ड क्रिप्स ने लेकिन एक निश्चित आंकड़ा तय नहीं किया। उन्होंने अपनी योजना में जो व्यवस्था दी है उसके अनुसार प्रांतीय विधिमंडल के सैंकड़ा 10 सदस्यों की समिति बने। असल में यह आंकडा 158 तक पहुंचता है। दोनों की दी गई संख्या में केवल 2 का ही फर्क है।
(2) चुनावों के बारे में सप्रू कमेटी की योजना के अनुसार संविधान समिति के लिए अनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के आधार से संयुक्त मतदान पद्धति से चुनाव कराना। इस मामले में क्रिप्स योजना और सप्रू योजना में संविधान समिति की रचना को लेकर कोई फर्क नहीं। क्रिप्स योजना में जाति के आधार पर आरक्षित सीटें नहीं हैं। इस मामले में क्रिप्स योजना से सप्रू योजना एकदम अलग है। यह अलगाव इतना ज्यादा है कि उसमें विशिष् समुदायों के लिए विशिष् अनुपात में आरक्षित जगहें देने का प्रबंध भी इस योजना में कर रखा गया है। लेकिन यह सामान्य फर्क हुआ। क्योंकि अगर क्रिप्स योजना कोई निश्चित आंकड़ा तय नहीं कर सकती तो आरक्षित जगहों संबंधी आनुपातिक प्रतिनिधित्व की योजना बनना सहज है। आगे दिए जा रहे कोष्क से इन दो योजनाओं के बीच प्रतिनिधित्व के विभाजन का फर्क आसानी से समझ आ जाएगा।